Edited By Manisha rana, Updated: 21 Nov, 2025 03:33 PM

आपका बेटा बीमार हो और इलाज के लिए पैसे न हो, कोई मदद के लिए तैयार न हो। बेटे के इलाज के लिए घर को गिरवी रखने की नौबत आ जाए। ऐसी परिस्थिति के बारे में सोचते हुए भी हर इंसान की रूह कांपने लगती है।
कुरुक्षेत्र (रणदीप) : आपका बेटा बीमार हो और इलाज के लिए पैसे न हो, कोई मदद के लिए तैयार न हो। बेटे के इलाज के लिए घर को गिरवी रखने की नौबत आ जाए। ऐसी परिस्थिति के बारे में सोचते हुए भी हर इंसान की रूह कांपने लगती है। ऐसी कहानी है महाराष्ट्र से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पहुंची मीणा पाटिल की। जो कि इस बार अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में खुद के तैयार किए गए उत्पादों को प्रदर्शित कर रही है। यहीं नहीं इन उत्पादों की सराहना के चलते 6 बार राज्य अवार्ड भी उन्हें मिल चुका है। आज हर कोई जहां उनके हौसले की सराहना कर रहा है तो वें भी अब अपने सपनों को पंख लगा पा रही है।
घर को गिरवी रख बेटे को बचाया
कुरुक्षेत्र में चल रहे अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पहुंची मीणा पाटिल ने बताया कि उनका परिवार मजदूरी करता था और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी, मगर मुश्किल उस समय खड़ी हो गई जब बेटे के बीमार होने पर किसी ने मदद नहीं की और घर को मात्र 30 हजार रुपये में गिरवी रखने की नौबत आ गई। घर को गिरवी रख बेटे का इलाज करा उसे बचाया।
अब सालाना कमा रही हैं 25 लाख
उन्होंने बताया कि इसके बाद गिरवी रखे गए घर को छुड़वाने की समस्या खड़ी हो गई। मगर हिम्मत नहीं हारी। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की ओर से बनाए गए स्वयं सहायता समूह से जुड़ खुद का रोजगार शुरू किया, जहां अपने गिरवी घर को छुड़ाया तो वहीं नया घर भी बनाया। आज साल की 25 लाख रुपये इनकम है, जिससे घर का गुजारा तो बेहतर तरीके से हो रहा है। साथ ही बच्चों को भी अच्छी शिक्षा मिल पा रही है।
(पंजाब केसरी हरियाणा की खबरें अब क्लिक में Whatsapp एवं Telegram पर जुड़ने के लिए लाल रंग पर क्लिक करें)