मनी लांड्रिंग केस में पूर्व जजपा MLA रामनिवास सुरजाखेड़ा को बड़ा झटका, जानें क्या है पूरा मामला

Edited By Isha, Updated: 26 Mar, 2026 01:34 PM

major setback for former jjp mla ramniwas surjakhera in money laundering case

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के मनी लांड्रिंग घोटाले में आरोपित जजपा के पूर्व विधायक रामनिवास सुरजाखेड़ा को कोई राहत नहीं दी है।

पंचकूला: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के मनी लांड्रिंग घोटाले में आरोपित जजपा के पूर्व विधायक रामनिवास सुरजाखेड़ा को कोई राहत नहीं दी है।

हाई कोर्ट ने पूर्व विधायक की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस त्रिभुवन दहिया की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि आरोपित जमानत के लिए निर्धारित कानूनी कसौटियों पर खरा नहीं उतर पाया और इस स्तर पर उसे रिहा नहीं किया जा सकता।

अदालत के समक्ष प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पेश तथ्यों के अनुसार, मामला वर्ष 2015 से 2019 के बीच एचएसवीपी के बैंक खाते से करीब 70 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि यह खाता विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं था और इसके माध्यम से सुनियोजित तरीके से फर्जी भुगतान किए गए। ईडी ने आरोप लगाया कि राम निवास उस समय अकाउंट्स असिस्टेंट था, जिसने सह-आरोपित वरिष्ठ लेखा अधिकारी सुनील कुमार बंसल के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची।


 
इसके तहत तीसरे पक्ष के बैंक खातों का इस्तेमाल कर सरकारी धन को अवैध रूप से ट्रांसफर किया गया और बाद में बड़ी रकम नकद निकालकर अपने पास रखी गई। जांच में यह भी सामने आया कि 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि विभिन्न खातों से नकद निकाली गई। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी कि आरोपित ने जांच में पूरा सहयोग किया है और लंबे समय से हिरासत में है। साथ ही, ट्रायल लंबा चलने की संभावना को आधार बनाते हुए जमानत की मांग की गई।

 
अदालत ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि मामले में कुल पांच आरोपित, 39 गवाह और 111 दस्तावेज शामिल हैं, जो यह संकेत नहीं देते कि ट्रायल असामान्य रूप से लंबा चलेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपित नौ जून 2025 से ही हिरासत में है, जबकि अधिकतम सजा सात वर्ष है, ऐसे में वर्तमान अवधि को “लंबी हिरासत” नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मनी लांड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में जमानत के लिए पीएमएलए की धारा 45 के तहत दोहरी शर्तें लागू होती हैं। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता इन शर्तों को पूरा करने में विफल रहा।

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