Edited By Isha, Updated: 24 Mar, 2026 11:46 AM

हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में दिल की बीमारियों का इलाज करा रहे हजारों मरीजों के लिए बुरी खबर है। प्रदेश के चार प्रमुख जिलों—गुरुग्राम, पंचकूला, अंबाला और फरीदाबाद के नागरिक अस्पतालों (Civil Hospitals) में चल रहे हार्ट सेंटरों
डेस्क : हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में दिल की बीमारियों का इलाज करा रहे हजारों मरीजों के लिए बुरी खबर है। प्रदेश के चार प्रमुख जिलों गुरुग्राम, पंचकूला, अंबाला और फरीदाबाद के नागरिक अस्पतालों (Civil Hospitals) में चल रहे हार्ट सेंटरों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का कैशलेस इलाज करने से साफ मना कर दिया है।
यह संकट पीपीपी (PPP) मोड पर चल रहे इन केंद्रों और राज्य सरकार के बीच भुगतान को लेकर पैदा हुआ है। इन सेंटरों का संचालन करने वाली निजी कंपनी, मेडिट्रिना ग्रुप, का दावा है कि स्वास्थ्य विभाग पर उनका लगभग 31 करोड़ रुपये (ब्याज सहित) बकाया है। कंपनी का कहना है कि लंबे समय से भुगतान न होने के कारण उनके लिए दवाइयों, स्टेंट और स्टाफ के खर्चों को वहन करना मुश्किल हो गया है। विशेष रूप से गुरुग्राम के सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल में यह सुविधा पिछले 9 महीनों से बाधित है।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भुगतान न होने के पीछे कुछ तकनीकी और प्रशासनिक कारण हैं। विभाग के अनुसार, एक अस्पताल परिसर में केवल एक ही आयुष्मान आईडी (Registration ID) हो सकती है। निजी कंपनी अपने लिए अलग आईडी की मांग कर रही थी, जिससे सिस्टम में दिक्कतें आईं। ताजा जानकारी के अनुसार, 19 मार्च 2026 को महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (DGHS) ने एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है जो इस पूरे मामले और बिलों की विसंगतियों की जांच करेगी।
इस गतिरोध का सबसे बुरा असर गरीब मरीजों पर पड़ रहा है। जो इलाज आयुष्मान कार्ड पर मुफ्त होता था, अब उसके लिए मरीजों को निजी अस्पतालों में 60,000 से 1,00,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। मरीजों को अब चंडीगढ़ PGI या दिल्ली के अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है, जहाँ पहले से ही भारी भीड़ है।