Edited By Isha, Updated: 09 May, 2026 12:01 PM

हरियाणा सरकार, उसके बोडों, निगमों और विभिन्न विभागों में तैनात हजारों कच्चे कर्मचारियों को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए उनके नियमितीकरण दावों पर नए सिरे से विचार करने का आदेश दिया है।
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार, उसके बोडों, निगमों और विभिन्न विभागों में तैनात हजारों कच्चे कर्मचारियों को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए उनके नियमितीकरण दावों पर नए सिरे से विचार करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 16 अप्रैल 2026 को मदन निर्णय के आधार पर नए सिरे से विचार करने का आदेश दिया है। प्रत्येक कर्मचारी के मामले की व्यक्तिगत जांच कर छह माह के भीतर कारण युक्त आदेश पारित करना होगा और दावे पर अंतिम निर्णय तक मौजूदा सेवा स्थिति में कोई प्रतिकूल बदलाव नहीं करने का भी निर्देश दिया है।
अदालत से सिंह मामले में खंडपीठ ने सिंगल बेंच की ओर से 22 जनवरी 2025 को दिए गए आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि अब 1996, 2003, 2011, 2014 अथवा 2024 की नीतियों पर विचार सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय सांविधानिक सिद्धांतों के अधीन होगा। अदालत ने माना कि उमा देवी फैसले और उसके बाद योगेश त्यागी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की अंतिम व्याख्या के बाद राज्य को प्रत्येक कर्मचारी के सेवा रिकॉर्ड, पात्रता और नीति की वैधता के अनुसार निर्णय लेना होगा।
हरियाणा सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि सभी कर्मचारियों के दावों की नए सिरे से जांच की जाएगी जिसके बाद कोर्ट ने व्यापक बहस में जाने के बजाय पूरी प्रक्रिया को प्रशासनिक पुनर्विचार के लिए भेज दिया। साथ ही प्रत्येक कर्मचारी को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के दो सप्ताह के भीतर अपने विभाग को विस्तृत अभ्यावेदन देने का निर्देश दिया गया है। इन मामलों में सरकार, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम, हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम, नगर निगम पानीपत, नगर परिषद भिवानी, हरियाणा आवास बोर्ड सहित कई सरकारी निकाय पक्षकार थे।