Edited By Isha, Updated: 06 May, 2026 02:28 PM

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 30 हजार से अधिक विद्यार्थियों का पुराने स्कूलों से नाम कटने के बावजूद नए शिक्षण संस्थानों में दाखिला नहीं हो पाया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रवेश से वंचित 30,919 विद्यार्थियों की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।
चंडीगढ़: प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 30 हजार से अधिक विद्यार्थियों का पुराने स्कूलों से नाम कटने के बावजूद नए शिक्षण संस्थानों में दाखिला नहीं हो पाया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रवेश से वंचित 30,919 विद्यार्थियों की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।
इस संकट के पीछे कई प्रमुख कारण सामने आए हैं। सबसे बड़ा कारण सरकारी स्कूलों और संस्कृति मॉडल स्कूलों में सीमित सीटें होना है। अनेक विद्यालय क्षमता पूरी होने, विषय संयोजन उपलब्ध न होने व छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन को आधार बनाकर प्रवेश से इन्कार कर रहे हैं। ब्यूरो
जिलावार प्रवेश से वंचित छात्रों का ब्योरा
अंबाला में एसएलसी कटने के बावजूद 1055 विद्यार्थियों को नए स्कूल में दाखिला नहीं मिला। भिवानी में 1,352, चरखी दादरी में 859, फरीदाबाद में 1,861, फतेहाबाद में 1,353 विद्यार्थी प्रवेश से वंचित हैं। गुरुग्राम में 3,162, हिसार में 2,222, झज्जर में 1,491, जींद में 1,307, कैथल में 1,435, करनाल में 3,045, कुरुक्षेत्र में 372, महेंद्रगढ़ में 733, नूंह (मेवात) में 847, पलवल में 561, पंचकूला में 1,251 विद्यार्थियों को दाखिला नहीं मिल पाया है। इसके अलावा पानीपत में 1,264, रेवाड़ी में 1,469, रोहतक में 799, सिरसा में 1,463, सोनीपत में 1,682, यमुनानगर में 1,315 विद्यार्थी प्रवेश के लिए भटक रहे हैं।