Edited By Isha, Updated: 06 May, 2026 01:36 PM

हरियाणा सरकार ने विदेश के भेजने वीजा दिलाने और टेवल कंसल्टेंसी नाम पर हो करा धोखाधड़ी को रोकने के लिए नए नगर संशोधित ट्रैवल एजेंट कानून को लागू जी ने कर दिया है।
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने विदेश के भेजने वीजा दिलाने और टेवल कंसल्टेंसी नाम पर हो करा धोखाधड़ी को रोकने के लिए नए नगर संशोधित ट्रैवल एजेंट कानून को लागू जी ने कर दिया है। पहले जहां कानून मुख्य बजा रूप से सीमित ट्रैवल एजेंट गतिविधियों 3. तक केंद्रित था अब संशोधित कानून ने के लगभग हर तरह के वीजा, विदेश यात्रा दावा सलाह और प्रचार नेटवर्क को अपने का दायरे में ले लिया है। साथ ही सजा का मंत्री प्रावधान भी सख्त कर दिया है।
पहले स्टडी वीजा, दूरिस्ट वीजा, मेडिकल वीजा, धार्मिक यात्राएं, मी सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल आयोजन या विवाह आधारित विदेश भेजने के मामलों में कई एजेंट कानूनी निगरानी से बाहर रह जाते थे। अब एजेंट, कंसल्टेंट और बिचौलिये कानून के तहत जवाबदेह होंगे और सीधा कानूनी कार्रवाई की ताकत मिल गई।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि नए कानून के तहत अब विदेश भेजने से जुड़े सेमिनार, विज्ञापन, वीजा सलाह, इंटरनेट प्रचार, डिजिटल मार्केटिंग और कंसल्टेंसी सेवाएं देने वालों पर भी कार्रवाई होगी। पहले फ्रीलांस दलाल, छोटे एजेंट, सोशल मीडिया प्रचारक, ऑनलाइन विज्ञापनदाता, विदेश भेजने वाले सेमिनार आयोजक और वीजा सलाह देने वाले कई लोग सीधे कानून के दायरे में नहीं आते थे।
पुराने कानून में दस्तावेज जांच सीमित थी जबकि नए संशोधन में शैक्षणिक प्रमाणपत्र, अंग्रेजी भाषा टेस्ट सर्टिफिकेट, पासपोर्ट, टिकट, वीजा और डिजिटल रिकॉर्ड तक को कानूनी रूप से शामिल किया है। वीजा प्रोसेसिंग पर अधिक सख्त कार्रवाई संभव होगी। पहले लाइसेंस रद्द करने के आधार सीमित थे लेकिन अब कानून की किसी भी धारा के उल्लंघन पर एजेंट का पंजीकरण सीधे रद्द किया जा सकेगा। यानी बिना पंजीकरण काम करना, फर्जी कागजात लगाना, झूठे विज्ञापन देना या गलत सलाह देना अब सीधे बड़े दंड के दायरे में शामिल हो गया है।
ये बदलाव लागू
- ट्रैवल एजेंट की परिभाषा में भी बदलाव होगा। विदेश में नौकरी दिलाने या भर्ती से जुड़ी सेवाओं को शामिल नहीं किया जाएगा।
- आरोपियों के खिलाफ दस साल तक सजा व अर्जित संपत्ति को जब्त करने का प्रावधान है।
- विदेश में नौकरी के लिए लोगों को भेजने वाले एजेंटों का प्रोटेक्टर जनरल ऑफ एमिग्रेट्स (पीजीई) के पास पंजीकरण होना जरूरी है। यदि राज्य कानून और किसी केंद्रीय कानून में टकराब होता है तो केंद्रीय कानून को प्राथमिकता मिलेगी।