Edited By Isha, Updated: 05 May, 2026 09:14 AM

हरियाणा की आंगनबाड़ियों में आने वाले हजारों बच्चों के लिए एक सुकून भरी खबर है। प्रदेश सरकार ने उन 4,000 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को सरकारी भवनों में स्थानांतरित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है, जो अब तक
चंडीगढ़: हरियाणा की आंगनबाड़ियों में आने वाले हजारों बच्चों के लिए एक सुकून भरी खबर है। प्रदेश सरकार ने उन 4,000 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को सरकारी भवनों में स्थानांतरित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है, जो अब तक संसाधनों के अभाव में किराए के कमरों या अस्थायी ढांचों में चल रहे थे। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस महत्वाकांक्षी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए कमर कस ली है और सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को सरकारी इमारतों में उपयुक्त स्थान चिह्नित करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
हकीकत यह है कि वर्तमान में प्रदेश के कई आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे स्थानों पर संचालित हैं, जहां बुनियादी सुविधाओं का भारी टोटा है। कहीं एक ही तंग कमरे में बच्चों को बिठाया जाता है, तो कहीं चिलचिलाती धूप और बारिश के बीच टिनशेड के नीचे केंद्र चलाने की मजबूरी है। ऐसी परिस्थितियों का सीधा असर बच्चों के पोषण और उनके मानसिक विकास पर पड़ता है। विभाग के ताजा पत्र के बाद अब इन केंद्रों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी स्कूलों या अन्य खाली पड़े सरकारी भवनों में शिफ्ट किया जाएगा, जिससे बच्चों को खेलकूद के लिए खुला मैदान, स्वच्छ शौचालय और सुरक्षित पेयजल मिल सकेगा।
सरकार की यह कवायद केवल स्थान बदलने तक सीमित नहीं है। जो केंद्र सरकारी भवनों में सफलतापूर्वक चल रहे हैं, उन्हें 'सक्षम आंगनबाड़ी' के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों को आधुनिक युग के अनुसार डिजिटल लर्निंग से जोड़ा जा रहा है, जिसमें LED स्क्रीन के जरिए बच्चों को शिक्षा दी जाएगी। साथ ही, बच्चों को ताजी सब्जियों और पोषण की जानकारी देने के लिए 'पोषण वाटिका' भी तैयार की जा रही है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों का मानना है कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चे के जीवन की पहली पाठशाला होते हैं। यदि यहीं उन्हें बेहतर माहौल मिलेगा, तो उनका स्वास्थ्य और सीखने की क्षमता दोनों बेहतर होंगे। प्री-स्कूल शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए आंगनबाड़ियों को सरकारी स्कूलों के साथ जोड़ना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, ताकि बच्चा जब स्कूल में प्रवेश करे, तो वह पहले से ही उस माहौल का अभ्यस्त हो। सरकार के इस फैसले से न केवल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को काम करने में आसानी होगी, बल्कि अभिभावकों का भरोसा भी सरकारी तंत्र पर बढ़ेगा।