कल रात आए तूफान-बारिश ने मचाई तबाही, जींद अनाज मंडी में भीगे 1 लाख गेहूं के बैग, आढ़तियों को भारी नुकसान

Edited By Manisha rana, Updated: 04 May, 2026 01:57 PM

one lakh bags of wheat got wet in jind grain market

जींद अनाज मंडी में कल रात आए तेज तूफान और बारिश ने तबाही मचा दी। खुले आसमान के नीचे रखे करीब एक लाख गेहूं के बैग बारिश में भीग गए।

जींद (अमनदीप पिलानिया) : जींद अनाज मंडी में कल रात आए तेज तूफान और बारिश ने तबाही मचा दी। खुले आसमान के नीचे रखे करीब एक लाख गेहूं के बैग बारिश में भीग गए। लिफ्टिंग की धीमी गति के कारण मंडी में गेहूं का भारी स्टॉक जमा हो गया था, जिसकी वजह से पर्याप्त शेड न होने पर बैग खुले में पड़े रहे। प्रशासन ने पहले ही बारिश से बचाव के पुख्ता इंतजाम करने और सभी आढ़तियों को अपनी गेहूं की ढेरियों को ढकने के आदेश दिए थे, लेकिन रात के तूफान में तिरपाल उड़ गए और पानी बैगों में टपकता नजर आया।

आढ़तियों का आरोप

मंडी के आढ़ती राजेश कुमार ने बताया कि कल रात तेज तूफान और बारिश से करीब एक लाख गेहूं के बैग भीग गए। इससे आढ़तियों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि जहां प्रतिदिन एक लाख के करीब लिफ्टिंग होनी चाहिए थी, वहां मात्र 50 हजार बैगों की ही लिफ्टिंग हो रही है। इस वजह से मंडी में गेहूं का स्टॉक बढ़ गया। सेड की भी कमी है। अगर एक अतिरिक्त सेड होता तो यह नुकसान नहीं होता। 

मार्केट कमेटी का बयान

मार्केट कमेटी के सेक्रेटरी संजीव जांगड़ा ने स्वीकार किया कि तेज तूफान और बारिश में तिरपाल उड़ जाने से करीब 50 हजार गेहूं के बैग भीग गए। उन्होंने कहा कि गेहूं बिकने से आढ़तियों को कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन गेहूं जरूर भीगा है। इस बार लिफ्टिंग स्लो है। प्रतिदिन 1 लाख से ज्यादा बैग उठाने चाहिए, लेकिन 50 हजार के आसपास ही हो रही है। उन्होंने बताया कि इस बार वेयरहाउस, हेफेड और DFSC तीन एजेंसियां गेहूं खरीद रही हैं, लेकिन लिफ्टिंग की रफ्तार कम है।

इस बार जींद अनाज मंडी में पिछले साल की तुलना में एक लाख अतिरिक्त गेहूं के बैग पहुंचे हैं। कुल 10 लाख गेहूं के बैग मंडी में पहुंच चुके हैं। धीमी लिफ्टिंग के कारण स्टॉक जमा होने से बारिश में भारी नुकसान हुआ है।मंडी में खुले आसमान के नीचे भीगे गेहूं के बैगों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। किसानों और आढ़तियों में नाराजगी व्याप्त है। प्रशासन से अब इस नुकसान की भरपाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर इंतजाम करने की मांग जोर पकड़ रही है।

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