Haryana में किसानों के लिए डिजिटल क्रांति, WhatsApp पर मिलेंगे J-फॉर्म.... अगले सीजन से 'किसान ऐप' होगा लॉन्च

Edited By Isha, Updated: 25 Apr, 2026 04:16 PM

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हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि अगले सप्ताह से, राज्य के सभी किसानों को WhatsApp के माध्यम से QR कोड आधारित J-फॉर्म भेजे जाएंगे, ताकि किसानों को ऋण और अन्य सुविधाएं प्राप्त करने में किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि अगले सप्ताह से, राज्य के सभी किसानों को WhatsApp के माध्यम से QR कोड आधारित J-फॉर्म भेजे जाएंगे, ताकि किसानों को ऋण और अन्य सुविधाएं प्राप्त करने में किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शनिवार को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा निवास में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले सीज़न से 'किसान ऐप' भी लॉन्च किया जाएगा, जिसमें किसान J-फॉर्म, भुगतान की स्थिति, भूमि बुवाई और उपज सत्यापन की स्थिति, गेट पास शेड्यूलिंग (अगली सरसों की फसल से शुरू), भूमि सत्यापन की स्थिति और अन्य सभी जानकारी 'किसान ई-खरीद ऐप' पर प्राप्त कर सकेंगे। जिसके कारण खरीद कार्य में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होगी।

राज्य में अब तक हुई गेहूं खरीद का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि रबी सीज़न 2026-27 में राज्य की मंडियों में गेहूं की बंपर आवक हुई है। इसने पिछले चार वर्षों के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सरकार ने खरीद व्यवस्था के लिए उचित प्रबंध किए हैं, जिसके चलते राज्य में गेहूं खरीद का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है और किसानों को समय पर भुगतान भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक राज्य की मंडियों में 21 हजार 44 करोड़ रुपये मूल्य का 81 लाख 48 हजार मीट्रिक टन गेहूं प्राप्त हुआ है, जो पिछले 4 वर्षों में सर्वाधिक है। केवल 11 अप्रैल को ही, एक ही दिन में रिकॉर्ड 7 लाख 71 हजार मीट्रिक टन गेहूं की आवक दर्ज की गई।

उन्होंने कहा कि अब तक 5 लाख 80 हजार किसान अपनी उपज लेकर मंडियों में पहुंचे हैं। प्रत्येक किसान की पहचान डिजिटल गेट पास के माध्यम से सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही, 79 लाख 14 हजार मीट्रिक टन गेहूं का बायोमेट्रिक सत्यापन भी पूरा कर लिया गया है, जो कि लगभग 97 प्रतिशत है। राज्य के किसान तेजी से तकनीक को अपना रहे हैं और इस पारदर्शी व्यवस्था पर अपना विश्वास जता रहे हैं। राज्य की मंडियों में 70 लाख 23 हज़ार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद पूरी हो चुकी है, साथ ही राज्य की मंडियों से 34 लाख 56 हज़ार मीट्रिक टन गेहूं की उठान भी हो चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 18 अप्रैल से उठान की प्रक्रिया में तेज़ी आई है। रोज़ाना 3.5 लाख मीट्रिक टन गेहूं की उठान की जा रही है। पिछले साल से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि रबी सत्र 2025-26 में कुल 72 लाख 89 हज़ार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी। वहीं, इस साल अब तक 81 लाख 48 हज़ार मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में आ चुका है।

उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान न कोई डिजिटल व्यवस्था थी, न कोई पारदर्शिता, और न ही मौके पर भुगतान किया जाता था। किसान मंडियों में लंबी कतारों में खड़े होते थे, कागज़ी टोकन लेते थे और भुगतान के लिए हफ़्तों, कभी-कभी महीनों तक इंतज़ार करते थे। 2014 के बाद से फसल खरीद की प्रक्रिया में बड़ा सुधार आया है। पहले केवल गेहूं और धान की खरीद MSP पर होती थी। आज हरियाणा देश का पहला ऐसा राज्य है, जहाँ सभी फसलों की खरीद MSP पर की जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल 'मेरी फसल-मेरा ब्योरा' पोर्टल पर 10 लाख 7 हज़ार 657 किसानों ने पंजीकरण कराया है। सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए ई-खरीद पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल गेट पास और एग्जिट पास की व्यवस्था लागू की है। इस सीज़न में अब तक 13 लाख 47 हज़ार डिजिटल गेट पास जारी किए जा चुके हैं।

फसल खरीद सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने राज्य की सभी 416 मंडियों और 281 खरीद केंद्रों की जियो-फेंसिंग की है। इससे यह सुनिश्चित हो गया है कि मंडी के बाहर किसी भी अनजान जगह पर कोई भी फर्जी खरीद संभव नहीं है। इसके साथ ही, खरीद प्रक्रिया की निगरानी CCTV के माध्यम से की जा रही है। राज्य की मंडियों में 932 CCTV कैमरे लगाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि आढ़तियों की सेवाओं को ध्यान में रखते हुए, उनका कमीशन 33.75 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 55 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इसके अलावा, इस साल बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को नुकसान पहुँचा है। लेकिन सरकार ने तुरंत कार्रवाई की और गुणवत्ता मानकों में ढील दी। जहाँ पहले चमक में कमी बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं थी, वहीं अब इसे 70 प्रतिशत तक स्वीकार किया जाता है। टूटे और सिकुड़े हुए दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी गई है। यह निर्णय खरीद शुरू होने की तारीख से ही लागू कर दिया गया, ताकि किसी भी किसान को कोई नुकसान न हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पिछले 11 वर्षों में किसानों को मुआवज़ा दिया है और फसल खराब होने पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 16,160 करोड़ रुपये की राशि दी है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत लगभग 20 लाख 18 हज़ार किसानों के बैंक खातों में 22 किस्तों में 7,562 करोड़ रुपये की राशि जमा की गई है।

इस अवसर पर विधायक श्री निखिल मदन, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरुण गुप्ता, खाद्य आपूर्ति विभाग के आयुक्त और सचिव श्री जे. गणेशन, सूचना, जनसंपर्क और भाषा विभाग की अतिरिक्त निदेशक श्रीमती वर्षा खंगवाल, श्री मनीष लौहान और मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव श्री प्रवीण आत्रे भी उपस्थित थे।

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