न्याय या मजाक? बेजुबान से क्रूरता की कीमत मात्र 50 रूपए, जानिए क्या है पूरा मामला

Edited By Isha, Updated: 25 Apr, 2026 04:04 PM

a fine of 50 was imposed on a person for tying a dog on the balcony

भीषण गर्मी में अपने कुत्ते को धूप में बांधकर रखने के मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जितेंद्र सिंह की अदालत ने दोषी को 50 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। पशु क्रूरता अधिनियम 1960 की धारा 11 के तहत यही अधिकतम सजा का प्रावधान है।

फरीदाबाद: भीषण गर्मी में अपने कुत्ते को धूप में बांधकर रखने के मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जितेंद्र सिंह की अदालत ने दोषी को 50 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। पशु क्रूरता अधिनियम 1960 की धारा 11 के तहत यही अधिकतम सजा का प्रावधान है।

मामला सेक्टर-82 की पुरी प्रणायम सोसायटी का है। 20 जून 2024 को बीपीटीपी थाना पुलिस ने वृंदा शर्मा की शिकायत पर प्राथमिकी कराई थी। आरोप था कि दीपक शर्मा ने अपने कुत्ते को तेज धूप में बांध रखा था। पुलिस ने कुत्ते को रेस्क्यू कराया था। इस दौरान आरोपी ने पुलिस की टीम के साथ दुर्व्यवहार भी किया।  

सिर्फ 50 ही क्यों?
अदालत द्वारा सुनाई गई इस मामूली सजा के पीछे एक कानूनी मजबूरी है। पशु क्रूरता अधिनियम 1960 के तहत इस तरह के अपराधों के लिए अधिकतम जुर्माने की राशि आज भी ₹50 ही तय है। यह कानून दशकों पुराना है और इसमें दंड की राशि को वर्तमान समय के अनुसार संशोधित नहीं किया गया है।

कानून में बदलाव की मांग
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का अक्सर यह तर्क रहता है कि ₹50 जैसे मामूली जुर्माने से अपराधियों के मन में कानून का डर खत्म हो जाता है। ऐसी सजाएं प्रतीकात्मक तो हो सकती हैं, लेकिन ये पशुओं के प्रति होने वाली क्रूरता को रोकने में कारगर साबित नहीं हो रही हैं।
 

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