Edited By Isha, Updated: 25 Apr, 2026 06:12 PM

: भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि आर्टिफिशल इंटेलीजेंस का प्रयोग न्यायधीशों के द्वारा अपने फैसले में नहीं होता, जबकि अन्य न्यायिक प्रणालियों में यह एक यूजफूल टूल है।
भिवानी(अशोक): भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि आर्टिफिशल इंटेलीजेंस का प्रयोग न्यायधीशों के द्वारा अपने फैसले में नहीं होता, जबकि अन्य न्यायिक प्रणालियों में यह एक यूजफूल टूल है। एआई में कई महत्वपूर्ण सकारात्मक बिंदु है। लेकिन इसमें कुछ नकारात्मक पक्ष भी है। इसके लिए जरूरी प्रईवेंटिव स्टप भी लिए जा रहे है। यह बात उन्होंने भिवानी के चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय के 5वें दीक्षांत समारोह में मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी डिग्रियां बांटने के उपरांत पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। इस मौके पर चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय के 5वें दीक्षांत समारोह में हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष व शिक्षा मंत्री महिपाल सिंह ढ़ांडा भी उनके साथ मौजूद रहे।
भिवानी जिला के गांव प्रेमनगर स्थित चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय के 5वें दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत व हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष ने 500 के लगभग छात्र-छात्राओं को डिग्रियां बांटी। जिनमें 43 विद्यार्थियों को गोल्ड मैडल, 12 को पीएचडी डिग्रियां भी दी गई। इस मौके पर भारत के मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि ग्रामीण परिवेश के छात्रों के लिए सफलता के मापदंड ज्यादा सख्त होते है। इसके लिए उन्हे अधिक मेहनत व निष्ठा से कार्य करने की आवश्यकता है, ताकि ग्रामीणा परिवेश के छात्रों के परिणाम बेहतर आए।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की विभिन्न प्रणालियों में एआई का प्रयोग होता है, परन्तु जजमेंट देते समय एआई का प्रयोग नहीं होता। वह न्यायाधीश का अपना विवेक होता है। पत्रकारों द्वारा बड़ी संख्या में न्यायालयों में केस पैंडिंग रहने के सवाल पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अब ऐसी स्थिति नहीं है तथा आने वाले समय में इसमें और भी सुधार देखने को मिलेगा।