Edited By Isha, Updated: 24 Apr, 2026 06:56 PM

हरियाणा सरकार ने महर्षि च्यवन सरकारी मेडिकल कॉलेज, कोरियवास (नारनौल) और श्री अटल बिहारी वाजपेयी सरकारी मेडिकल कॉलेज, छायंसा (फरीदाबाद) में मुफ़्त डायलिसिस सेवाओं के विस्तार को मंज़ूरी दे दी है।
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने महर्षि च्यवन सरकारी मेडिकल कॉलेज, कोरियवास (नारनौल) और श्री अटल बिहारी वाजपेयी सरकारी मेडिकल कॉलेज, छायंसा (फरीदाबाद) में मुफ़्त डायलिसिस सेवाओं के विस्तार को मंज़ूरी दे दी है। यह फ़ैसला बजट में की गई घोषणाओं को ज़मीनी स्तर पर और तय समय सीमा के भीतर लागू करने की दिशा में एक अहम कदम है।
हरियाणा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव, डॉ. सुमिता मिश्रा ने छायंसा और कोरियवास के सरकारी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिया है कि वे 'पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप' (PPP) मॉडल के तहत अगले दो हफ़्तों के भीतर डायलिसिस सेवाएँ शुरू कर दें। इस पहल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किडनी के मरीज़ों को ज़रूरी इलाज समय पर और आसानी से मिल सके।
उन्होंने बताया कि 18 अक्टूबर, 2024 से सरकारी अस्पतालों में मुफ़्त डायलिसिस सेवा शुरू होने के बाद से, राज्य के 22 संस्थानों में 2.60 लाख से ज़्यादा डायलिसिस सत्र (sessions) पूरे किए जा चुके हैं, जिन पर 57 करोड़ रुपये से ज़्यादा की राशि खर्च की गई है। इस पहल से डायलिसिस पर निर्भर मरीज़ों को काफ़ी आर्थिक राहत मिली है, क्योंकि यह इलाज बहुत महँगा होता है और इसे लंबे समय तक जारी रखना पड़ता है।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि यह विस्तार मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा 2 मार्च, 2026 को पेश किए गए बजट में की गई घोषणा के अनुरूप किया जा रहा है। उस बजट में सरकारी मेडिकल कॉलेजों और उप-मंडल अस्पतालों में 18 नए डायलिसिस केंद्र स्थापित करने का प्रावधान किया गया था।
उन्होंने बताया कि फ़िलहाल, PPP मॉडल के तहत PGIMS रोहतक, SHKM सरकारी मेडिकल कॉलेज नलहर, BPS सरकारी मेडिकल कॉलेज खानपुर कलां (सोनीपत) और कल्पना चावला सरकारी मेडिकल कॉलेज करनाल जैसे कई प्रमुख संस्थानों में डायलिसिस सेवाएँ सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं। ये केंद्र मरीज़ों को गुणवत्तापूर्ण और भरोसेमंद इलाज मुहैया करा रहे हैं।
इस विस्तार से विशेष रूप से ग्रामीण और छोटे शहरों के मरीज़ों को फ़ायदा होगा, क्योंकि इससे उनकी यात्रा की दूरी और इंतज़ार का समय कम हो जाएगा। सेवाओं को स्थानीय स्तर तक पहुँचाकर, राज्य सरकार का लक्ष्य डायलिसिस पर निर्भर परिवारों के शारीरिक और आर्थिक बोझ को कम करना है।