हरियाणा में बंद पड़े सरकारी ट्यूबवेलों की जमीन वापस करेगी सैनी सरकार, किसानों की हुई जीत

Edited By Isha, Updated: 15 Apr, 2026 03:53 PM

saini government will return land for defunct government tube wells in haryana

हरियाणा की सियासत में 'किसान कार्ड' हमेशा से निर्णायक रहा है और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस मोर्चे पर कोई ढील देने के मूड में नहीं दिख रहे। राज्य सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए उन हजारों किसानों

डेस्क: हरियाणा की सियासत में 'किसान कार्ड' हमेशा से निर्णायक रहा है और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस मोर्चे पर कोई ढील देने के मूड में नहीं दिख रहे। राज्य सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए उन हजारों किसानों को राहत दी है, जिनकी जमीनें दशकों पहले सरकारी ट्यूबवेल लगाने के नाम पर ली गई थीं। वर्तमान में प्रदेश के कई जिलों में ऐसे सैकड़ों ट्यूबवेल हैं जो या तो तकनीकी कारणों से सफेद हाथी बन चुके हैं या फिर उनका जलस्तर गिरने से वे पूरी तरह बंद हो चुके हैं। अब सरकार इन अनुपयोगी जमीनों को वापस उनके मूल मालिकों (किसानों) को सौंपने जा रही है। इस फैसले से न केवल किसानों को उनकी पैतृक जमीन का हिस्सा वापस मिलेगा, बल्कि खेती के रकबे में भी बढ़ोत्तरी होगी।

बजट घोषणा को धरातल पर उतारने की तैयारी

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री नायब सैनी ने वित्त वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट पेश करते समय इस योजना का खाका खींचा था। बजट पूर्व चर्चाओं में विभिन्न किसान यूनियनों ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया था कि सिंचाई विभाग के पास गांवों में ऐसी बहुत सी छोटी-छोटी जमीनें हैं, जिनका कोई सरकारी इस्तेमाल नहीं हो रहा है। किसानों का तर्क था कि चूंकि वे जमीनें उनके खेतों के बीच में या किनारे पर स्थित हैं, इसलिए वे उनके लिए ज्यादा उपयोगी साबित हो सकती हैं। मुख्यमंत्री ने इसी सलाह को गंभीरता से लेते हुए अब सिंचाई और पंचायत विभाग को तत्काल सर्वे के आदेश जारी कर दिए हैं।

मुआवजा और कलेक्टर रेट का पेच

जमीन वापसी की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने एक फॉर्मूला भी तय किया है। दरअसल, जब ये जमीनें अधिग्रहित की गई थीं, तब भू-मालिकों ने सरकारी मुआवजा प्राप्त किया था। अब नियमानुसार, जो किसान अपनी जमीन वापस लेना चाहते हैं, उन्हें मौजूदा 'कलेक्ट्रेट रेट' के हिसाब से भुगतान करना होगा। इसके बाद ही मालिकाना हक का हस्तांतरण (ट्रांसफर) संभव हो पाएगा। सिंचाई विभाग के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेशभर के जिला उपायुक्तों को पत्र लिखकर सहयोग मांगा गया है ताकि पटवारियों और फील्ड स्टाफ के जरिए ऐसी जमीनों का सटीक रिकॉर्ड तैयार किया जा सके।

किसानों के बीच खुशी की लहर

सरकार के इस कदम का ग्रामीण इलाकों में व्यापक स्वागत हो रहा है। किसान संगठनों का मानना है कि इससे उन छोटे विवादों का भी अंत होगा जो अक्सर सरकारी जमीन और निजी खेतों की सीमाओं को लेकर होते रहते थे। साथ ही, किसान अब उस खाली पड़ी जमीन पर फिर से बिजाई कर सकेंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद एक पोर्टल के जरिए आवेदन मांगे जा सकते हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया 'सिंगल विंडो' सिस्टम के तहत संपन्न हो सके। माना जा रहा है कि अगले कुछ महीनों में जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज हो जाएगी, जिससे हजारों किसान परिवारों को सीधा लाभ पहुंचेगा।

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