Edited By Isha, Updated: 14 Apr, 2026 10:54 AM

हरियाणा की राजनीति में 'गब्बर' के नाम से मशहूर कैबिनेट मंत्री अनिल विज और पुलिस अधिकारियों के बीच की तल्खी एक बार फिर सुर्खियों में है। कैथल में करीब एक महीने पहले शुरू हुआ 'सस्पेंशन ड्रामा' अब अपने अंजाम तक पहुँच ग
अंबाला(अमन): हरियाणा की राजनीति में 'गब्बर' के नाम से मशहूर कैबिनेट मंत्री अनिल विज और पुलिस अधिकारियों के बीच की तल्खी एक बार फिर सुर्खियों में है। कैथल में करीब एक महीने पहले शुरू हुआ 'सस्पेंशन ड्रामा' अब अपने अंजाम तक पहुँच गया है। जहाँ एक तरफ अपनी जिद पर अड़ीं कैथल की SP उपासना सिंह को जिले से हटाकर CID में भेज दिया गया है, वहीं दूसरी ओर मंत्री विज के आदेश पर अब DGP ने भी अंतिम मुहर लगा दी है।
क्या था पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत 13 फरवरी 2026 को हुई थी। अनिल विज कैथल में जनता की शिकायतें सुन रहे थे। इसी दौरान एक मामले की जांच में भारी कोताही पाए जाने पर विज का पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर ही संबंधित ASI को सस्पेंड करने का फरमान सुना दिया। तभी वहां मौजूद SP उपासना सिंह और मंत्री के बीच बहस छिड़ गई। SP का तर्क था कि बिना विभागीय जांच और ठोस आधार के इस तरह सस्पेंशन नहीं किया जा सकता। अधिकारियों और मंत्री के बीच हुई इस 'ऑन-कैमरा' बहस ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी थी।

सरकार की बड़ी कार्रवाई: SP का तबादला
मंत्री और जिले के पुलिस कप्तान के बीच का यह टकराव सरकार को रास नहीं आया। 23 मार्च को प्रदेश सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए तबादला सूची जारी की। इसमें उपासना सिंह को कैथल के SP पद से मुक्त कर CID विभाग में तैनात कर दिया गया। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह तबादला मंत्री विज की नाराजगी का सीधा परिणाम है।
DGP की मुहर
विवाद का सबसे अहम मोड़ तब आया जब विभाग ने उस ASI के सस्पेंशन ऑर्डर पर कार्यवाही की जिसे बचाने के लिए SP ने स्टैंड लिया था। हरियाणा के DGP ने अब उस ASI के निलंबन आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
विज का पुराना अंदाज
यह पहली बार नहीं है जब अनिल विज और पुलिस अधिकारियों के बीच ठनी हो। इससे पहले भी कई बार विज जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों को फटकार लगा चुके हैं। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर संदेश दे दिया है कि प्रशासन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे इसके लिए बड़े अधिकारियों से ही क्यों न टकराना पड़े।