Edited By Isha, Updated: 15 Apr, 2026 03:47 PM

हरियाणा के व्यापारिक जगत के लिए राहत भरी एक बड़ी खबर आई है। प्रदेश की नायब सैनी सरकार ने छोटे और मध्यम स्तर के दुकानदारों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए 'मुख्यमंत्री व्यापारी सामूहिक निजी दुर्घटना बीमा
डेस्क: हरियाणा के व्यापारिक जगत के लिए राहत भरी एक बड़ी खबर आई है। प्रदेश की नायब सैनी सरकार ने छोटे और मध्यम स्तर के दुकानदारों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए 'मुख्यमंत्री व्यापारी सामूहिक निजी दुर्घटना बीमा योजना' के पंजीकरण की खिड़की खोल दी है। इस योजना का सबसे आकर्षक पहलू इसका नाममात्र का शुल्क है—महज 50 रुपये जमा कर व्यापारी लाखों रुपये का सुरक्षा कवच हासिल कर सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो भी व्यापारी इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, वे 31 मई 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल पर अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।
संकट की घड़ी में बनेगा संबल: क्या है योजना का स्वरूप?
प्रदेश सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन परिस्थितियों में व्यापारियों को टूटने से बचाना है, जब कोई अनहोनी हो जाए। योजना के तहत दो मुख्य पहलुओं पर ध्यान दिया गया है। यदि किसी पंजीकृत व्यापारी की किसी दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से दिव्यांग (अपंग) हो जाता है, तो सरकार उसके परिवार को 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। दुर्घटना के साथ-साथ यदि आगजनी, बाढ़ या किसी प्राकृतिक आपदा के कारण दुकान में रखे माल या स्टॉक का नुकसान होता है, तो सरकार उस वित्तीय घाटे की भरपाई के लिए भी कवर देगी। इसमें अलग-अलग श्रेणियों के आधार पर सहायता राशि तय की गई है।
50 का पंजीकरण और 31 मई की डेडलाइन
सरकार ने इस योजना को 'यूनिवर्सल' बनाने की कोशिश की है ताकि गली-मोहल्ले के छोटे दुकानदार भी इससे जुड़ सकें। यही वजह है कि पंजीकरण शुल्क को मात्र 50 रुपये रखा गया है। हरियाणा व्यापारी कल्याण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल रखा गया है ताकि बिचौलियों की भूमिका न रहे और पारदर्शिता बनी रहे।
आवेदन कैसे करें?
इच्छुक व्यापारी हरियाणा व्यापारी कल्याण बोर्ड के आधिकारिक पोर्टल http://htwbhry.in पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। याद रहे कि आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई 2026 है। इसके बाद पोर्टल बंद कर दिया जाएगा और बीमा लाभ केवल उन्हीं को मिलेगा जिनका डेटा पोर्टल पर अपडेट होगा।
क्यों जरूरी है यह कदम?
जानकारों की मानें तो हरियाणा जैसे राज्य में, जहाँ व्यापारिक गतिविधियां अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, वहाँ अक्सर छोटे दुकानदार आगजनी या चोरी जैसी घटनाओं के बाद कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। निजी बीमा कंपनियों के प्रीमियम इतने महंगे होते हैं कि छोटा दुकानदार उन्हें वहन नहीं कर पाता। ऐसे में सरकार का यह 'माइक्रो-इंश्योरेंस' मॉडल व्यापारियों के लिए एक बड़ा सहारा बनकर उभरेगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के एक प्रवक्ता ने बताया, "मुख्यमंत्री का विजन उद्योग और व्यापार के बुनियादी ढांचे को सिर्फ सड़कों से नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा से भी मजबूत करना है। हम चाहते हैं कि हर छोटा दुकानदार निडर होकर अपना काम करे।