Edited By Isha, Updated: 08 May, 2026 05:13 PM

हरियाणा में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत गरीब बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले निजी स्कूलों पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मौलिक शिक्षा निदेशालय ने राज्य के उन 1537 स्कूलों
डेस्क: हरियाणा में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत गरीब बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले निजी स्कूलों पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मौलिक शिक्षा निदेशालय ने राज्य के उन 1537 स्कूलों को अंतिम चेतावनी जारी की है, जिन्होंने अब तक अपने पोर्टल पर आरक्षित सीटों का विवरण साझा नहीं किया है।
13 मई 2026 तक का समय
विभाग ने इन सभी डिफ़ॉल्टर स्कूलों को 6 दिन की मोहलत देते हुए निर्देश दिया है कि वे 13 मई 2026 तक ऑनलाइन 'सीट डिक्लेरेशन पोर्टल' पर अनिवार्य रूप से जानकारी अपलोड करें। यदि स्कूल इस समय सीमा के भीतर डेटा नहीं भरते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
किन कक्षाओं की जानकारी देना अनिवार्य?
निदेशालय के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, स्कूलों को नर्सरी (Nursery), एलकेजी (LKG), यूकेजी (UKG), पहली कक्षा (1st Class) में उपलब्ध कुल सीटों का ब्योरा देना होगा:
क्यों जरूरी है सीट डिक्लेरेशन?
आरटीई अधिनियम के तहत निजी स्कूलों को अपनी 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं। जब तक स्कूल पोर्टल पर कुल सीटों की संख्या घोषित नहीं करेंगे, तब तक इन आरक्षित सीटों पर दाखिले की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाएगी। विभाग का यह कदम दाखिला प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और समय पर एडमिशन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।