Edited By Manisha rana, Updated: 08 May, 2026 01:06 PM

भाजपा की राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं विधायक चंद्रमोहन द्वारा दायर मानहानि के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पंचकूला की जिला अदालत में सिविल न्यायधीश अरुणिमा चौहान ने आदेश पारित करते हुए...
चंडीगढ़ (धरणी) : भाजपा की राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं विधायक चंद्रमोहन द्वारा दायर मानहानि के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पंचकूला की जिला अदालत में सिविल न्यायधीश अरुणिमा चौहान ने आदेश पारित करते हुए उन्हें कड़ी हिदायत दी है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रेखा शर्मा पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजनलाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन के खिलाफ किसी भी प्रकार की अभद्र या अमर्यादित टिप्पणी नहीं कर सकतीं। चंद्रमोहन की तरफ से दीपांशु बंसल एडवोकेट ने पक्ष रखा।अदालत ने इस मामले में रेखा शर्मा को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।

पंचकूला नगर निगम चुनाव 2026 के बीच राजनीतिक बयानबाजी को लेकर अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए प्रतिवादी रेखा को ऐसी किसी भी टिप्पणी से परहेज करने के निर्देश दिए हैं, जो प्रथम दृष्टया मानहानिकारक प्रतीत होती हो। मामला पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता चंद्रमोहन द्वारा दायर सिविल वाद से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान उनके तथा उनके दिवंगत पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने का आरोप लगाया।
अदालत में वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता दीपांशु बंसल ने दलील दी कि 24 अप्रैल 2026 को पंचकूला नगर निगम चुनाव प्रचार के दौरान प्रतिवादी रेखा शर्मा द्वारा सार्वजनिक मंच से चंद्र मोहन एवं उनके पिता को लेकर गंभीर और लापरवाह टिप्पणियां की गईं। याचिका में कहा गया कि इन टिप्पणियों को मीडिया में व्यापक रूप से प्रसारित किया गया क्योंकि रेखा शर्मा एक आपत्तिजनक ब्यान दिया था,जिससे उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा।चंद्रमोहन ने अदालत से मांग की कि प्रतिवादी को भविष्य में इस प्रकार के कथित मानहानिकारक बयान देने से रोका जाए। इस दौरान वादी पक्ष ने कई न्यायिक निर्णयों का हवाला भी दिया।

वहीं प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता रविश कौशिक ने अदालत में कहा कि संबंधित बयान केवल विपक्षी दल की कार्यशैली पर राजनीतिक टिप्पणी थी, न कि किसी को बदनाम करने का प्रयास। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि कथित सामग्री को प्रतिवादी द्वारा प्रसारित नहीं किया गया, बल्कि मीडिया ने उसे फैलाया। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि किसी बयान के मानहानिकारक होने या न होने का निर्धारण ट्रायल के दौरान ही संभव है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माननीय अरुणिमा चौहान की अदालत ने कहा कि विवाद की उत्पत्ति सार्वजनिक रैली में दिए गए बयान से हुई है और यह साफ है कि वादी चंद्रमोहन की भावनाएं उक्त टिप्पणियों से आहत हुई हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि इस प्रकार की घटनाएं दोहराई गईं तो इससे विवाद और बढ़ सकते हैं।अदालत ने पंचकूला नगर निगम चुनाव को शांतिपूर्ण एवं सुचारू रूप से संपन्न कराने की आवश्यकता पर बल देते हुए प्रतिवादी रेखा शर्मा को ऐसी टिप्पणियां करने से रोकने के निर्देश दिए, जो एक सामान्य समझ वाले व्यक्ति को मानहानिकारक लग सकती हों। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश प्रतिवादी के “निष्पक्ष राजनीतिक आलोचना” के अधिकार पर रोक नहीं माना जाएगा।मामले में अगली सुनवाई के लिए 7 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन द्वारा दायर मानहानि याचिका से जुड़ा है। आरोप है कि रेखा शर्मा ने एक सार्वजनिक मंच से भजनलाल परिवार के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिससे उनकी छवि को ठेस पहुंची है। चंद्रमोहन ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि इन टिप्पणियों पर तुरंत रोक लगाई जाए और उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
अगली सुनवाई पर देना होगा जवाब
कोर्ट ने अब मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त रखी है जिसमें रेखा शर्मा को जवाब देना होगा। राजनीतिक गलियारों में इस अदालती सख्ती को एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। चंद्रमोहन ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि इन टिप्पणियों पर तुरंत रोक लगाई जाए और उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
(पंजाब केसरी हरियाणा की खबरें अब क्लिक में Whatsapp एवं Telegram पर जुड़ने के लिए लाल रंग पर क्लिक करें)