Edited By Manisha rana, Updated: 08 May, 2026 03:41 PM

पानीपत जिले के गांव पसीना खुर्द में गुरुवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया। यहां मकान की छत अचानक गिर गई, जिसके मलबे के नीचे दबने से 4 वर्षीय मासूम की मौत हो गई।
पानीपत (सचिन शर्मा) : पानीपत जिले के गांव पसीना खुर्द में गुरुवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया। यहां मकान की छत अचानक गिर गई, जिसके मलबे के नीचे दबने से 4 वर्षीय मासूम की मौत हो गई, जबकि उसकी मां और बड़ा भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के वक्त तीनों घर के भीतर सो रहे थे। गनीमत रही कि पड़ोसियों ने समय रहते दरवाजा तोड़कर घायलों को बाहर निकाला, वरना जान-माल का नुकसान और भी ज्यादा हो सकता था।
दोपहर में सोते समय हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार हादसा 7 मई की दोपहर करीब 4 बजे हुआ। आयुष के ताऊ बालिंद्र कुमार ने बताया कि उनका छोटा भाई रविंद्र दिहाड़ी मजदूरी करता है। दोपहर को रविंद्र अपने दोनों बच्चों को स्कूल से लेकर घर आया था। खाना खाने के बाद रविंद्र वापस मजदूरी पर चला गया, जबकि उसकी पत्नी सोनिया (30), बेटा साहिल (7) और छोटा बेटा आयुष (4) कमरे के अंदर सो रहे थे। रोजाना वे कमरे की कुंडी नहीं लगाते थे, लेकिन कल उन्होंने दरवाजा अंदर से बंद किया हुआ था।
गाटर टूटने से गिरी कड़ियों वाली छत
बताया जा रहा है कि मकान काफी पुराना था और कड़ियों वाली छत का गाटर अचानक बीच से टूट गया। छत गिरते ही जोरदार आवाज हुई, जिसे सुनकर पड़ोसी तुरंत मौके पर पहुंचे। दरवाजा अंदर से बंद होने के कारण पड़ोसियों ने उसे तोड़कर प्रवेश किया और मलबे में दबे मां और बच्चों को बाहर निकाला। पड़ोसी तुरंत तीनों को गंभीर हालत में सिवाह बाईपास स्थित एक निजी अस्पताल ले गए। बालिंद्र ने बताया कि अस्पताल ले जाते समय आयुष की सांसें चल रही थीं, लेकिन वहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं 7 साल के साहिल और मां सोनिया को प्राथमिक उपचार दिया गया। इस हादसे में सोनिया का हाथ टूट गया है और उसके चेहरे व कान पर भी गंभीर चोटें आई हैं। प्राथमिक उपचार के बाद साहिल और सोनिया को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
2 महीने पहले ही स्कूल जाना शुरू किया था
परिजनों ने बताया कि मासूम आयुष का दो महीने पहले ही एक प्ले-वे स्कूल में दाखिला करवाया गया था। वह अभी ठीक से स्कूल जाना सीखा ही था कि कुदरत के कहर ने उसे छीन लिया। बड़ा बेटा साहिल पहली कक्षा में पढ़ता है। इस घटना के बाद से पूरे गांव में शोक की लहर है और गरीब मजदूर परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
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