बाढ़ की मार झेल चुके यमुनानगर के खानूवाला गांव के लिए राहत की खबर, सिंचाई विभाग ने उठाया बड़ा कदम

Edited By Manisha rana, Updated: 22 May, 2026 03:34 PM

news of relief for khanuwala village of yamunanagar which has been hit by flood

यमुनानगर में हर साल बाढ़ का कहर झेलने वाले खानूवाला गांव के लोगों के लिए आखिरकार राहत की खबर सामने आई है।

यमुनानगर (परवेज खान) : यमुनानगर में हर साल बाढ़ का कहर झेलने वाले खानूवाला गांव के लोगों के लिए आखिरकार राहत की खबर सामने आई है। बरसों से पानी की मार झेल रहे ग्रामीण अब उम्मीद लगा रहे हैं कि इस बार मानसून उनके घर, खेत और जिंदगी तबाह नहीं करेगा। वजह है सोम नदी के किनारों को पक्का करने का बड़ा काम, जिसे अब सिंचाई विभाग ने तेज कर दिया है। 

बता दें कि खानूवाला गांव के पीछे से गुजरने वाली सोम नदी पिछले दो-तीन सालों से ग्रामीणों के लिए आफत बनी हुई थी। हर मानसून में नदी उफान पर आती और देखते ही देखते पानी गांव में घुस जाता। हालात इतने भयावह हो चुके थे कि दो साल पहले करीब 7 फीट तक पानी गांव के अंदर घुस गया था। लोगों के घर डूब गए, पशु बह गए, खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई और कई परिवारों को मजबूरन गांव छोड़कर सुरक्षित जगहों पर पलायन करना पड़ा। अब सिंचाई विभाग ने बड़ा कदम उठाते हुए सोम नदी के दोनों किनारों को हजारों टन पत्थरों से मजबूत करने का काम शुरू कर दिया है। 

विभाग की तरफ से पत्थर साइट पर पहुंचा दिए गए हैं और जल्द ही इन्हें नदी के दोनों तटबंधों पर लगाया जाएगा। दावा किया जा रहा है कि इससे नदी के कटाव पर रोक लगेगी और बाढ़ का पानी गांव की तरफ नहीं बढ़ पाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यह काम समय रहते और सही तरीके से पूरा हो गया तो न सिर्फ खानूवाला गांव बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों को भी बड़ी राहत मिलेगी। क्योंकि हर साल बाढ़ का पानी सिर्फ एक गांव नहीं, पूरे इलाके की जिंदगी अस्त-व्यस्त कर देता है।

करीब 40 करोड़ की आएगी लागत 

सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या यह काम मानसून आने से पहले पूरा हो पाएगा? क्योंकि अगर काम अधूरा रह गया तो एक बार फिर हजारों लोगों की उम्मीदें पानी में बह सकती हैं। बताया जा रहा है कि यमुनानगर जिले में सिंचाई विभाग करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से 28 अलग-अलग साइट्स पर बाढ़ सुरक्षा से जुड़े कार्य कर रहा है। लेकिन खानूवाला के लोगों के लिए यह सिर्फ सरकारी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि जिंदगी और तबाही के बीच की लड़ाई है। इस बार गांव वाले दुआ कर रहे हैं कि सोम नदी का रौद्र रूप नहीं, राहत देखने को मिले।

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