Edited By Isha, Updated: 22 May, 2026 02:21 PM

हरियाणा में अवैध खनन मामलों पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों को केवल जुर्माना लगाकर क्यों छोड़ दिया गया और उन्हें भ
चंडीगढ़: हरियाणा में अवैध खनन मामलों पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों को केवल जुर्माना लगाकर क्यों छोड़ दिया गया और उन्हें भविष्य के लिए अयोग्य क्यों नहीं घोषित किया गया। चीफ जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने खान एवं भूविज्ञान विभाग के महानिदेशक को तीन सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को होगी।
देवेंद्र यादव की जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि सरकार अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई नहीं कर रही। सरकार ने कोर्ट को बताया कि अवैध खनन में शामिल ठेकेदारों पर 33.90 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब नियमों का उल्लंघन साबित हुआ तो ठेकेदारों को सिर्फ आर्थिक दंड देकर क्यों छोड़ दिया गया। सरकार ने दलील दी कि संबंधित ठेकेदार शॉर्ट टर्म परमिट धारक थे। हालांकि, कोर्ट ने हरियाणा माइनर मिनरल रूल्स-2012 का हवाला देते हुए कहा कि माइनिंग परमिट, कॉन्ट्रैक्ट और लीज सभी 'मिनरल कंसेशन' की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में नियम तोड़ने वालों पर समान कठोर कार्रवाई लागू होगी।