HC ने कहा- सांस लेने के लिए ऑक्सीजन नहीं होगी तो वर्ल्ड बैंक भी मदद नहीं करेगा, जानें पूरा मामला

Edited By Manisha rana, Updated: 22 May, 2026 10:16 AM

hc said  if there is no oxygen even the world bank will not help

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुग्राम मैट्रो विस्तार परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई पर कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई स्वीकार नहीं की जा सकती। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यदि सांस लेने के लिए ऑक्सीजन ही नहीं होगी तो...

चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुग्राम मैट्रो विस्तार परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई पर कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई स्वीकार नहीं की जा सकती। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यदि सांस लेने के लिए ऑक्सीजन ही नहीं होगी तो वर्ल्ड बैंक भी आपकी मदद नहीं करेगा।

दरअसल गुरुग्राम मैट्रो रेल लिमिटेड (जी.एम.आर.एल.) की ओर से मैट्रो विस्तार परियोजना के लिए 489 और पेड़ काटने की अनुमति मांगी गई थी। कंपनी ने कोर्ट को बताया कि इससे पहले करीब 1700 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी जा चुकी है और बदले में 7300 पौधे लगाए गए हैं। जी.एम.आर.एल. की ओर से कहा गया कि यह लगभग 28 किलोमीटर लंबी मैट्रो विस्तार परियोजना है, जिसकी लागत 5000 करोड़ रुपए से बढ़कर 7000 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। परियोजना के लिए वर्ल्ड बैंक से वित्तीय सहायता पर बातचीत चल रही है और यदि समय पर कार्य नहीं हुआ तो यह सहायता प्रभावित हो सकती है।

कंपनी ने दलील दी कि गुरुग्राम में बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक जाम को देखते हुए यह परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है। हालांकि कोर्ट ने पूछा कि जब मैट्रो का ट्रैक एलिवेटेड है और पिल्लर सीमित जगह लेते हैं तो फिर इतने अधिक पेड़ काटने की जरूरत क्यों है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि न्यूनतम संख्या में ही पेड़ों की कटाई की जाए। साथ ही संबंधित डी.एफ.ओ. को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए कि 489 प्रस्तावित पेड़ों में से जितने अधिक संभव हों, उन्हें बचाया जाए ताकि क्षेत्र में हरित आवरण बना रहे।

एक के बदले 10 पौधारोपण का दावा

कंपनी ने दावा किया कि वह 'एक के बदले दस' के अनुपात में पौधारोपण कर रही है और अब तक 7300 पौधे लगाए जा चुके हैं, जिनकी '100 प्रतिशत सर्वाइवल रेट' है। यह पौधा रोपण के. एम. पी. हाईवे के पास लगभग 21 किलोमीटर दूर किया गया है। इस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि कोर्ट पहले ही कह चुकी है कि प्रतिपूरक पौधारोपण यथासंभव 5 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि केवल पौधे लगाने का दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि शहर को 'कंक्रीट जंगल' बनने से बचाया जाए। कोर्ट ने जी.एम.आर.एल. को पहले किए गए वनीकरण कार्य की मासिक सर्वाइवल रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि रिपोर्ट में कोई कमी पाई गई या समय पर रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई तो मामले को स्वतः सूचीबद्ध कर सुनवाई की जाएगी।

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