Edited By Isha, Updated: 14 May, 2026 10:46 AM

प्रदेश में प्राकृतिक व जैविक खेती के लिए काम होगा। कृषि विभाग की 800 एकड़ जमीन पर आगामी 10 वर्षों तक प्राकृतिक एवं जैविक खेती की जाएगी। यह जमीन पट्टे पर किसानों को दी जाएगी। प्राकृतिक या जैविक
चंडीगढ़: प्रदेश में प्राकृतिक व जैविक खेती के लिए काम होगा। कृषि विभाग की 800 एकड़ जमीन पर आगामी 10 वर्षों तक प्राकृतिक एवं जैविक खेती की जाएगी। यह जमीन पट्टे पर किसानों को दी जाएगी। प्राकृतिक या जैविक खेती करने वाले किसानों को 5 वर्षों तक प्रति वर्ष 10 हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जाएगा।
कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को अपनी उपज का प्रमाणन पहले से ही एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) से कराना होगा जिससे उनके उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके। कृषि विभाग की जो भूमि पट्टे पर दी जाएगी उसमें अनिवार्य रूप से 10 वर्षों तक प्राकृतिक या जैविक खेती करनी होगी।
किसानों को प्रमाणन प्रक्रिया में असुविधा न हो इसके लिए राज्यस्तर पर ही एक अधिकृत संस्था विकसित की जा रही है। इसके तहत हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी को जैविक खेती के प्रमाणीकरण के लिए अधिकृत संस्था के रूप में नामित किया जाएगा। इसका लाभ यह होगा कि किसानों को निजी एजेंसियों के पास चक्कर नहीं काटने होंगे। पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, चरखी दादरी और नारनौल में प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए मंडियों में विशेष स्थान उपलब्ध करवाया जाएगा।
इन मंडियों में उपज की गुणवत्ता की जांच के लिए आधुनिक प्रयोगशालाओं का भी निर्माण हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड कराएगा। इन प्रयोगशालाओं के स्थापित होने के बाद उपज के परीक्षण और प्रमाणीकरण के लिए एपीडा से मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया भी जल्द पूरी कर ली जाएगी। इससे हरियाणा के जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान मिलेगी।