Haryana में एक जुलाई से फिर शुरू होगा SIR, 2 करोड़ 6 लाख मतदाताओं की होगी जांच... धरे जाएंगे संदिग्ध वोटर्स

Edited By Isha, Updated: 15 May, 2026 02:05 PM

sir to resume in haryana from july 1

हरियाणा में आने वाले महीनों में सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि ‘हर वोट की वैधता’ सबसे बड़ा मुद्दा बनने जा रही है। भारत निर्वाचन आयोग ने प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआार) लागू करने का ऐलान कर दिया है

डेस्क: हरियाणा में आने वाले महीनों में सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि ‘हर वोट की वैधता’ सबसे बड़ा मुद्दा बनने जा रही है। भारत निर्वाचन आयोग ने प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआार) लागू करने का ऐलान कर दिया है। इस प्रक्रिया के तहत राज्य के करीब 2 करोड़ 6 लाख मतदाताओं का दोबारा सत्यापन होगा। चुनाव आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार हरियाणा में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 21 जुलाई को प्रकाशित होगी, जबकि अंतिम निर्वाचक नामावली 22 सितंबर को जारी की जाएगी।

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि प्रदेश में करीब 25 लाख मतदाताओं को संदिग्ध श्रेणी में माना जा रहा है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तेज हो गया है कि क्या एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वोट कटेंगे। यही वजह है कि इस पूरे अभियान को हरियाणा का अब तक का सबसे बड़ा ‘वोटर ऑडिट’ माना जा रहा है। एसआईआर की टाइमिंग ने राजनीतिक माहौल को और ज्यादा गर्म कर दिया है। दरअसल, अक्तूबर-2024 में हुए हरियाणा विधानसभा चुनावों के बाद से कांग्रेस लगातार भाजपा पर वोट चोरी के आरोप लगाती रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ने ‘एच फाइल्स’ नाम से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हरियाणा चुनावों में करीब 25 लाख वोटों में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। कांग्रेस का दावा था कि मतदाता सूची में बड़े स्तर पर हेरफेर हुआ।

 
यही नहीं, प्रदेश कांग्रेस ने ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान भी चलाया था। कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग और भाजपा सरकार पर सवाल उठाती रही है। अब जब चुनाव आयोग खुद व्यापक सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर रहा है तो राजनीतिक हलकों में इसे कांग्रेस के आरोपों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य केवल मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाना है, ताकि फर्जी, डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें।

 क्या है एसआईआर  

एसआईटार यानी स्पेशल इनटेंसिव रिवीजन (विशेष गहन पुनरीक्षण)। यह चुनाव आयोग की विशेष प्रक्रिया होती है, जिसमें मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट किया जाता है। इस दौरान मुख्य रूप से मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। डुप्लीकेट वोट खत्म किए जाते हैं। दूसरे स्थान पर शिफ्ट हो चुके मतदाताओं का सत्यापन होता है। नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं। गलत प्रविष्टियों को सुधारा जाता है। चुनाव आयोग का कहना है कि इससे चुनावी प्रक्रिया ज्यादा निष्पक्ष और पारदर्शी बनेगी। लेकिन विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों की नजर इस बात पर भी रहेगी कि कहीं वास्तविक मतदाताओं के नाम गलती से सूची से बाहर न हो जाएं।

घर-घर पहुंचेगा बीएलओ 

एसआईआर प्रक्रिया का सबसे अहम हिस्सा होगा डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन। बीएलओ हर घर तक पहुंचकर मतदाताओं का भौतिक सत्यापन करेंगे। मतदाताओं को पहचान और निवास संबंधी दस्तावेज भी दिखाने पड़ सकते हैं। राजनीतिक दलों के बीएलए यानी बूथ लेवल एजेंट्स भी सूची की जांच करेंगे और संभावित गड़बड़ियों पर आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। ऐसे में बूथ स्तर पर राजनीतिक दलों की सक्रियता काफी बढ़ने वाली है।

एसआईआर का पूरा कार्यक्रम

चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार हरियाणा में एसआईआर प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी। 5 जून से 14 जून तक अधिकारियों-कर्मचारियों की ट्रेनिंग और वोटर लिस्ट प्रिंटिंग का काम होगा। 15 जून से 14 जुलाई तक बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। 21 जुलाई को प्रारंभिक मतदाता सूची प्रकाशित होगी। 21 जुलाई से 20 अगस्त तक लोग नए नाम जोड़ने, नाम हटाने और सुधार के लिए आवेदन कर सकेंगे। नया नाम जोड़ने के लिए फार्म-6, नाम हटाने के लिए फार्म-7 तथा सुधार के लिए फार्म-8 भरना होगा। दावों और आपत्तियों पर ईआरओ और एईआरओ अधिकारी सुनवाई कर फैसला लेंगे। 22 सितंबर, 2026 को अंतिम निर्वाचक नामावली प्रकाशित की जाएगी।

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