Edited By Manisha rana, Updated: 18 May, 2026 03:19 PM

अंबाला के नेशनल हाईवे 152-D पर कुछ दिन पहले मिले संदिग्ध कैमरों ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए थे। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अंबाला के पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत ने तुरंत इस ब्लाइंड केस की जांच सीआईए-1 टीम को सौंपी थी। सीआईए 1...
अंबाला (अमन कपूर) : अंबाला के नेशनल हाईवे 152-D पर कुछ दिन पहले मिले संदिग्ध कैमरों ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए थे। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अंबाला के पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत ने तुरंत इस ब्लाइंड केस की जांच सीआईए-1 टीम को सौंपी थी। सीआईए 1 की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, साइबर सेल और अपने खुफिया तंत्र की मदद से जाल बिछाया और पंजाब से दो आरोपियों को दबोच लिया।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान पंजाब के तरनतारन के रहने वाले मनप्रीत उर्फ मन्नी और फिरोजपुर के अनमोल के रूप में हुई है। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ था, जब थाना सेक्टर-9 के एएसआई रविश कुमार एक अन्य मामले की जांच के लिए शंभू टोल प्लाजा के पास पहुंचे थे। वहां पुल पर लगे दो कैमरों पर उनकी नजर पड़ी, जिनका फोकस पूरी तरह दिल्ली की तरफ आने-जाने वाले रास्ते पर था।
जताई जा रही ये आशंका
आशंका जताई जा रही है कि इन कैमरों के जरिए सेना की मूवमेंट पर नजर रखी जा रही थी। जब पुलिस ने NHAI और टोल प्रशासन से पूछा, तो उन्होंने इन कैमरों से साफ पल्ला झाड़ लिया था। अब 5 दिन के रिमांड के दौरान सीआईए की टीम यह पता लगाएगी कि इस साजिश के पीछे और कौन-कौन से चेहरे शामिल हैं।
एसपी अंबाला के मुताबिक पकड़े गए दोनों आरोपियों ने कबूल किया है कि वे सीमा पार पाकिस्तान में बैठे कुछ संदिग्ध लोगों के सीधे संपर्क में थे। आरोपियों को भारी रकम का लालच दिया गया था, जिसके बदले उन्होंने इन कैमरों का पासवर्ड और सिम की लाइव डिटेल्स पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के साथ शेयर की थीं। मकसद साफ था इन कैमरों के जरिए नेशनल हाईवे की लाइव फुटेज और सुरक्षा बलों की मूवमेंट का संवेदनशील डेटा सीधे सरहद पार भेजा जा रहा था। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि इस देश विरोधी नेटवर्क के बाकी चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।
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