10 मई : अंबाला में इतिहास रचेगा 1857 का भव्य शहीद स्मारक, 700 करोड़ की लागत से आजादी की गाथा होगी जीवंत

Edited By Isha, Updated: 08 May, 2026 03:21 PM

grand 1857 martyrs  memorial in ambala will create history

हरियाणा के ऊर्जा एवं परिवहन मंत्री ने कहा  कि हरियाणा की वीर भूमि अंबाला छावनी में बन रहा “आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक” आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, बलिदान और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देगा। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित यह...

चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा के ऊर्जा एवं परिवहन मंत्री ने कहा  कि हरियाणा की वीर भूमि अंबाला छावनी में बन रहा “आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक” आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, बलिदान और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देगा। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित यह स्मारक अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है ।

करीब 22 एकड़ भूमि पर 700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बन रहा यह स्मारक केवल एक भवन नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की अमर गाथा का जीवंत दस्तावेज होगा। यहां 1857 की क्रांति के हर पहलू को आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों से प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि देश-दुनिया से आने वाले लोग भारत की पहली आजादी की लड़ाई में हरियाणा और विशेषकर अंबाला की भूमिका को गहराई से समझ सकें।

अंबाला से उठी थी आजादी की पहली चिंगारी

इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि 10 मई 1857 को मेरठ में क्रांति का बिगुल बजा, लेकिन उससे पहले अंबाला छावनी में अंग्रेजी शासन के खिलाफ सैनिकों के भीतर विद्रोह की आग सुलग चुकी थी। रविवार, 10 मई 1857 को सुबह लगभग 9 बजे भारतीय रेजिमेंट 60वीं नेटिव इन्फैंट्री ने अंग्रेजों के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया था।
हरियाणा की इस धरती ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सबसे पहले आवाज बुलंद करने वालों को जन्म दिया। अंबाला, रोहतक, हिसार, झज्जर, रेवाड़ी, गुड़गांव और करनाल क्षेत्र में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी सत्ता को खुली चुनौती दी थी। राव तुलाराम, नवाब अब्दुर्रहमान खान झज्जर, राजा नाहर सिंह बल्लभगढ़ और अनेक वीरों ने अपने प्राणों की आहुति देकर स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। यही कारण है कि  हरियाणा को वीरों की भूमि कहा जाता है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि यह स्मारक केवल अतीत की याद नहीं बल्कि युवाओं को देश के लिए समर्पण की प्रेरणा देने वाला केंद्र बनेगा।

अनिल विज का ड्रीम प्रोजेक्ट बना राष्ट्रीय पहचान

अंबाला छावनी से सातवीं बार विधायक बने और हरियाणा सरकार में लगातार तीसरी बार कैबिनेट मंत्री बने अनिल विज लंबे समय से इस परियोजना को साकार करने में जुटे हुए थे। उनके अथक प्रयासों के चलते यह ड्रीम प्रोजेक्ट अब मूर्त रूप ले चुका है।
विज ने कहा कि स्मारक में 1857 की क्रांति से जुड़े संघर्षों, युद्धों और घटनाओं का ऐसा जीवंत चित्रण किया जाएगा कि लोग स्वयं को उस दौर में महसूस करेंगे। यहां सैनिकों की वर्दियां, उनके हथियार, युद्ध सामग्री और क्रांति से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज प्रदर्शित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि संग्रहालय को अत्याधुनिक तकनीक से विकसित किया जा रहा है। डिजिटल गैलरी, ऑडियो-विजुअल प्रेजेंटेशन और इंटरएक्टिव स्क्रीन के माध्यम से क्रांति की कहानी प्रस्तुत की जाएगी।

स्मारक में दिखेगा इतिहास का भव्य स्वरूप

आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक” देश के सबसे आधुनिक युद्ध स्मारकों में शामिल होगा। स्मारक में आने वाले लोगों के लिए अनेक आकर्षण केंद्र बनाए गए हैं।

इंटरप्रीटेशन सेंटर बनेगा जानकारी का केंद्र
स्मारक परिसर में विशाल इंटरप्रीटेशन सेंटर बनाया गया है। इसमें वीआईपी रूम, रिसेप्शन, शॉप्स, बच्चों के खेलने का क्षेत्र, टॉयलेट ब्लॉक, कॉन्फ्रेंस हॉल, डाइनिंग हॉल और वीआईपी मीटिंग सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह केंद्र पर्यटकों और शोधकर्ताओं को 1857 की क्रांति से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करवाएगा।

दो मंजिला संग्रहालय में जीवंत होगा स्वतंत्रता संग्राम

स्मारक का सबसे बड़ा आकर्षण दो मंजिला आधुनिक संग्रहालय होगा। इसमें म्यूजियम गैलरी, ऑडियो-विजुअल हॉल, लॉबी, कार्यालय क्षेत्र और शहीदी वॉल बनाई गई है। शहीदी वॉल पर लगभग 700 शहीद सैनिकों के नाम अंकित किए जा रहे हैं, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए।
यहां डिजिटल तकनीक के माध्यम से युद्ध के दृश्य, सैनिकों की गतिविधियां और अंग्रेजी शासन के खिलाफ उठी क्रांति को प्रदर्शित किया जाएगा।

ओपन एयर थिएटर में होगा देशभक्ति का संदेश

करीब 2500 लोगों की क्षमता वाले ओपन एयर थिएटर का निर्माण भी किया गया है। यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम, देशभक्ति नाटक, लाइट एंड साउंड शो और ऐतिहासिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी।
इसके अतिरिक्त एग्जीबिशन हॉल, फूड कोर्ट, रिहर्सल रूम, फिल्ट्रेशन रूम और अन्य आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।

ऑडिटोरियम और ई-लाइब्रेरी होंगी विशेष आकर्षण

स्मारक परिसर में विशाल ऑडिटोरियम भवन बनाया गया है, जिसमें कॉफी शॉप, फूड कोर्ट, लॉबी, कोर्ट यार्ड, पुस्तकालय और ई-लाइब्रेरी की सुविधा होगी।
यहां शोधार्थियों और विद्यार्थियों को स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित ऐतिहासिक दस्तावेज और 
डिजिटल सामग्री उपलब्ध करवाई जाएगी।

डेढ़ सौ फुट ऊंचा मेमोरियल टॉवर बनेगा पहचान

स्मारक का सबसे भव्य हिस्सा करीब डेढ़ सौ फुट ऊंचा मेमोरियल टॉवर होगा। इस टॉवर में हाई स्पीड लिफ्ट, आर्ट गैलरी और वॉटर बॉडी जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी।
रात के समय विशेष रोशनी से यह टॉवर दूर से ही आकर्षण का केंद्र बनेगा।

वाटर बॉडी और वॉटर स्क्रीन बढ़ाएंगी भव्यता

स्मारक परिसर में विभिन्न प्रकार के फव्वारे, वॉटर स्क्रीन और कनेक्टिंग ब्रिज बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य स्मारक को आधुनिक और आकर्षक स्वरूप प्रदान करना है।यहां आयोजित होने वाले लाइट एंड साउंड शो में पानी की स्क्रीन पर स्वतंत्रता संग्राम की झलक दिखाई जाएगी।

पार्किंग से लेकर हेलीपैड तक की सुविधा

स्मारक में आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए डबल बेसमेंट अंडरग्राउंड पार्किंग बनाई गई है। यहां 400 कारों और 20 बसों के खड़े होने की व्यवस्था होगी।
इसके अतिरिक्त स्टाफ के लिए 10 क्वार्टर बनाए जा रहे हैं। परिसर में सूचना केंद्र, टिकट काउंटर, सिक्योरिटी रूम और वीवीआईपी मूवमेंट के लिए हेलीपैड सुविधा भी विकसित की गई है।

हरियाणा के स्वतंत्रता संग्राम का गौरवशाली इतिहास

हरियाणा की धरती सदैव वीरता और बलिदान की प्रतीक रही है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणा के अनेक क्षेत्रों ने अंग्रेजी शासन को चुनौती दी थी।
रेवाड़ी के राव तुलाराम ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा संभाला। झज्जर के नवाब अब्दुर्रहमान खान ने स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत किया। बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह ने दिल्ली की क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रोहतक, हिसार और करनाल क्षेत्रों में किसानों और सैनिकों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह किया। अंग्रेजों ने हरियाणा के अनेक गांवों को दंडित किया और सैकड़ों लोगों को फांसी पर चढ़ा दिया। इतिहासकार मानते हैं कि हरियाणा की जनता ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश की आजादी की नींव मजबूत की।

पर्यटन और शोध का केंद्र बनेगा स्मारक

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्मारक भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा। यहां देशभर के विद्यार्थी, इतिहासकार और पर्यटक पहुंचेंगे। डिजिटल तकनीक से सुसज्जित यह संग्रहालय युवाओं को भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ने का कार्य करेगा। साथ ही यह हरियाणा की ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

10 मई का दिन होगा ऐतिहासिक

स्वतंत्रता संग्राम की पहली चिंगारी की स्मृति में 10 मई को प्रस्तावित उद्घाटन समारोह को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी की जा रही है। इस अवसर पर देशभक्ति कार्यक्रम, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि यह स्मारक राष्ट्र के उन अमर बलिदानियों को सच्ची श्रद्धांजलि है, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां जब इस स्मारक को देखेंगी तो उन्हें एहसास होगा कि आजादी कितने संघर्ष और बलिदानों के बाद मिली है। यही भावना राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी प्रेरणा बनेगी।


 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!