Edited By Isha, Updated: 26 Mar, 2026 05:16 PM

हरियाणा में दिव्यांग कर्मचारियों की ट्रांसफर नीति में "अंकों के भेदभाव" को लेकर मचे घमासान के बीच राज्य सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद सरकार अब
चंडीगढ़ : हरियाणा में दिव्यांग कर्मचारियों की ट्रांसफर नीति में "अंकों के भेदभाव" को लेकर मचे घमासान के बीच राज्य सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद सरकार अब इस विवादित नीति की समीक्षा करने को तैयार हो गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सरकार दिव्यांगता के प्रतिशत (जैसे 40%, 60% या 80%) के आधार पर अलग-अलग अंक दे रही है, जो समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' के अनुसार, 40% से अधिक दिव्यांगता वाले सभी कर्मचारी एक ही श्रेणी में आते हैं। उनके बीच अंकों का बंटवारा करना कानूनन गलत है। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने इस व्यवस्था को पहली नजर में "अतार्किक" करार दिया। कोर्ट के कड़े रुख को देखते हुए हरियाणा के एडवोकेट जनरल ने नीति पर दोबारा विचार करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी, जहाँ सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि वह ट्रांसफर नीति में क्या बदलाव करने जा रही है। इस फैसले से हरियाणा के हजारों दिव्यांग कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से पारदर्शी और समान ट्रांसफर नीति की मांग कर रहे थे।