Edited By Isha, Updated: 22 Mar, 2026 04:15 PM

हरियाणा शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने और बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब स्कूलों के मुखिया (Principals/Headmasters) अपने स्तर पर स्कूल परिसर में होने वाले छोटे-मोटे तकनीकी और निर्माण...
डेस्क: हरियाणा शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने और बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब स्कूलों के मुखिया (Principals/Headmasters) अपने स्तर पर स्कूल परिसर में होने वाले छोटे-मोटे तकनीकी और निर्माण कार्यों को करवा सकेंगे। इसके लिए उन्हें अब निदेशालय या जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय से अनुमति लेने की औपचारिकता में समय बर्बाद नहीं करना होगा।
अक्सर देखा जाता है कि मामूली कमियों के कारण स्कूल का काम प्रभावित होता है। अब मुखिया निम्नलिखित कार्य करा सकेंगे। टूटे हुए स्विच, पंखों की मरम्मत, बिजली की वायरिंग और पानी के नल या पाइप की लीकेज ठीक कराना।दरवाजों-खिड़कियों के हैंडल, कांच बदलना या छोटी-मोटी सफेदी और दरारें भरना। शौचालयों की छोटी-मोटी मरम्मत और सफाई व्यवस्था को सुचारू बनाना। स्कूल के बगीचे का रखरखाव और खेल के मैदान की सफाई।
माननी होगी ये शर्तें
हालांकि सरकार ने वित्तीय अधिकार दिए हैं, लेकिन पारदर्शिता (Transparency) सुनिश्चित करने के लिए कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। इन कार्यों के लिए स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) की सहमति अनिवार्य होगी। किए गए खर्च का उचित बिल और रिकॉर्ड संधारित करना होगा, जिसका ऑडिट किया जा सकता है। एक निश्चित राशि तक के ही काम स्थानीय स्तर पर कराए जा सकेंगे (सीमा विभाग द्वारा तय की गई है)।
शिक्षा मंत्री के अनुसार, इस फैसले से स्कूलों में 'रेड टेपिस्म' (लालफीताशाही) कम होगी। छोटे-मोटे कामों के लिए फाइलें महीनों तक दफ्तरों में नहीं अटकेंगी, जिससे छात्रों को बेहतर और सुरक्षित वातावरण तुरंत मिल सकेगा।