युद्ध की आग में झुलसा अंबाला का व्यापार,  शिपिंग लाइनों ने वसूला भारी सरचार्ज...अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर्स रद्द होने का डर

Edited By Isha, Updated: 22 Mar, 2026 04:08 PM

ambala trade scorched by the flames of war

दुनिया के कुछ हिस्सों में चल रहे युद्ध और समुद्री रास्तों (खासकर लाल सागर और खाड़ी क्षेत्रों) में असुरक्षा के चलते अंबाला का निर्यात उद्योग गहरे संकट में है। शिपिंग कंपनियों द्वारा लगाए गए भारी-भरकम 'वार रिस्क सरचार्ज' के कारण अंबाला से होने वाला...

डेस्क:  दुनिया के कुछ हिस्सों में चल रहे युद्ध और समुद्री रास्तों (खासकर लाल सागर और खाड़ी क्षेत्रों) में असुरक्षा के चलते अंबाला का निर्यात उद्योग गहरे संकट में है। शिपिंग कंपनियों द्वारा लगाए गए भारी-भरकम 'वार रिस्क सरचार्ज' के कारण अंबाला से होने वाला करोड़ों रुपये का निर्यात ठप हो गया है। निर्यातकों का कहना है कि लागत इतनी बढ़ गई है कि पुराने सौदों को पूरा करना अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है।


अंबाला के वैज्ञानिक उपकरण निर्माता और निर्यातक संघ के अनुसार, पहले जो कंटेनर सामान्य भाड़े पर जाते थे, अब उन पर 'वार सरचार्ज' और 'पीक सीजन सरचार्ज' के नाम पर 300% से 400% तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों को जाने वाली सप्लाई पूरी तरह से प्रभावित हुई है। भाड़ा बढ़ने के साथ-साथ खाली कंटेनरों की उपलब्धता भी कम हो गई है।

निर्यातकों का कहना है कि विदेशी खरीदार बढ़ा हुआ भाड़ा देने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में अंबाला की यूनिट्स में तैयार माल गोदामों में डंप पड़ा है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो कई अंतरराष्ट्रीय अनुबंध (Contracts) रद्द हो सकते हैं, जिससे अंबाला के उद्योगों को भारी वित्तीय नुकसान होगा।


सप्लाई ठप होने का असर अब उत्पादन पर भी दिखने लगा है। कई फैक्ट्रियों ने काम के घंटे कम कर दिए हैं, जिससे दिहाड़ी मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट मंडराने लगा है। निर्यातकों ने केंद्र सरकार और वाणिज्य मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि शिपिंग शुल्कों को नियंत्रित किया जा सके।

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