Edited By Krishan Rana, Updated: 24 Mar, 2026 03:56 PM

वही शहर जिसने देश को पहली मिक्सी दी। वही शहर जिसकी पहचान रसोई के इस जरूरी उपकरण से जुड़ी है, आज खुद अपनी साख बचाने की जद्दोजहद
अंबाला (अमन कपूर) : वही शहर जिसने देश को पहली मिक्सी दी। वही शहर जिसकी पहचान रसोई के इस जरूरी उपकरण से जुड़ी है, आज खुद अपनी साख बचाने की जद्दोजहद कर रहा है। अंबाला का मिक्सी उद्योग, जो न केवल भारत बल्कि दुबई, कतर और अफ्रीकी देशों तक अपनी चमक बिखेरता था, आज वैश्विक युद्ध और महंगाई के दोहरे प्रहार से कराह रहा है।
रसोई में हर दिन चलने वाली और विदेश तक अंबाला का नाम पहुंचाने वाली मिक्सी पश्चिमी देशों में युद्ध के कारण संकट में है। यही शहर है, जिसने देश को पहली मिक्सी दी। अब यही उद्योग कच्चे माल की महंगाई और वैश्विक हालात के दबाव में हांफता नजर आ रहा है। करीब 200 छोटी-बड़ी इकाइयां मिक्सी, जूसर, ग्राइंडर और चापर बनाती हैं। इनके साथ जिले के 150 से ज्यादा ट्रेडर्स जुड़े हैं और सालाना कारोबार करीब 250 करोड़ रुपये तक पहुंचता है। इससे करीब 15 हजार परिवारों की रोजी-रोटी सीधी जुड़ी है।
युद्ध लंबा चला तो इनका सभी पर और अधिक संकट आना तय है। यहां निर्मित मिक्सी न केवल प्रदेश और देश, बल्कि विदेश तक जाती है। कच्चे माल के रेट लगभग दोगुने होने से 15 प्रतिशत तक रेट में बढ़ाने पड़े हैं। कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है। निर्यात प्रभावित हुआ है। यहां की मिक्सी युगांडा, दुबई और कतर समेत कई देशों में भेजी जाती है। अफ्रीकी देशों में भी यहीं से सप्लाई होती है।
मौजूदा हालात में निर्यात प्रभावित हो गया है। इससे कारोबारियों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। लागत बढ़ रही है, दूसरी तरफ बाजार सिकुड़ रहा है। इस धंधे से जुड़े लोगों का कहना है उन्हें ऑर्डर मिलने बंद हो गए हैं रेट में बहुत वेरिएशन है। महंगा माल कोई भी खरीदने को तैयार नही है। लेबर के लिए भी दिक्कतें बढ़ रही है।
व्यापारियों ने कहा कि अंबाला के इस गौरवशाली उद्योग को अब केवल सरकारी हस्तक्षेप और बाजार की स्थिरता का ही सहारा है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो वो शोर जो कभी अंबाला की आर्थिक मजबूती का प्रतीक था, हमेशा के लिए खामोश हो सकता है।
(पंजाब केसरी हरियाणा की खबरें अब क्लिक में Whatsapp एवं Telegram पर जुड़ने के लिए लाल रंग पर क्लिक करें)