Edited By Isha, Updated: 17 Mar, 2026 09:57 AM

गर्मी में दिल्लीवासियों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना सरकार के लिए चुनौती है। इसका मुख्य कारण आवश्यकता से लगभग ढाई सौ मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) कम पानी मिलना है। दिल्ली सरकार जल आपूर्ति
डेस्क: गर्मी में दिल्लीवासियों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना सरकार के लिए चुनौती है। इसका मुख्य कारण आवश्यकता से लगभग ढाई सौ मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) कम पानी मिलना है। दिल्ली सरकार जल आपूर्ति बढ़ाने के लिए हरियाणा सरकार से बातचीत कर रही है। सीवेज उपचार संयंत्र (एसटीपी) से उपचारित जल देकर 30 क्यूसेक प्राप्त करने का प्रयास है।
इसी तरह से उत्तर प्रदेश से उपचारित पानी के बदले गंगा जल लेने का प्रयास किया जा रहा है। करनाल स्थित मूनक हेडवर्क्स से दिल्ली के हैदरपुर जल शोधन संयंत्र (डब्ल्यूटीपी) तक लगभग 102 किलोमीटर लंबी नहर के कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त होने के कारण लगभग 30 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है। यदि इस नहर को ठीक कर दिल्ली को पेयजल के लिए पूरा 330 क्यूसेक पानी उपलब्ध करा दिया जाए तो परेशानी कम होगी। दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा के अनुसार, नहर की मरम्मत और अतिरिक्त पानी के लिए हरियाणा सरकार से बातचीत चल रही है। हरियाणा से 30 क्यूसेक कच्चा पानी लेने और इसके बदले उसे सिंचाई कार्य के लिए उपचारित पानी देने का प्रस्ताव है। इसके बदले हरियाणा से यमुना का पानी लिया जाएगा।
दिल्ली में लगभग 1250 एमजीडी पानी की आवश्यकता है। इसकी तुलना में नौ जल शोधन संयंत्रों (डब्ल्यूटीपी) से लगभग एक हजार एमजीडी पानी उपलब्ध होता है। इसमें से भी लगभग 50 प्रतिशत पानी रिसाव से बर्बाद या चोरी हो जाता है। इस कारण गर्मी के दिनों में परेशानी बढ़ जाती है।
दिल्ली में कच्चे पानी का मुख्य स्रोत हरियाणा की मूनक नहर है। इससे दिल्ली की कुल जल आपूर्ति का 60 प्रतिशत हिस्सा आता है। उत्तर भारतीय राज्यों के बीच जल बंटवारे की व्यवस्था के अनुसार हरियाणा द्वारा मूनक नहर की शाखा कैरियर लिंक नहर (सीएलसी) और दिल्ली सब-ब्रांच (डीएसबी) से दिल्ली को लगभग 1133 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराता है। इसमें से डीएसबी नहर के माध्यम से मूनक हेडवर्क्स पर हरियाणा से दिल्ली को 330 क्यूसेक पानी मिलता है।