हरियाणा कांग्रेस के लिए चार बागी, पांचवां फाइलों से गायब! पांचवां कौन? सबसे बड़ा सियासी सवाल

Edited By Isha, Updated: 19 Mar, 2026 12:08 PM

four rebels for haryana congress the fifth is missing

हरियाणा के राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस में जो बवाल शुरू हुआ था, वह अब एक नई और ज्यादा उलझी हुई कहानी में बदल गया है। एक ऐसी कहानी, जिसमें आंकड़े कुछ और कहते हैं और पार्टी की कार्रवाई कुछ और

डेस्क:  हरियाणा के राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस में जो बवाल शुरू हुआ था, वह अब एक नई और ज्यादा उलझी हुई कहानी में बदल गया है। एक ऐसी कहानी, जिसमें आंकड़े कुछ और कहते हैं और पार्टी की कार्रवाई कुछ और। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब क्रॉस वोटिंग पांच ने की, तो ‘बागी’ सिर्फ चार ही क्यों हैं।

कांग्रेस के भीतर यह मामला अब सिर्फ अनुशासन का नहीं, बल्कि विश्वसनीयता और पारदर्शिता का बन गया है। बुधवार को नयी दिल्ली में कांग्रेस के हरियाणा मामलों के प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चार विधायकों के नाम सार्वजनिक कर दिए। लेकिन पांचवें विधायक का नाम न सामने आया, न ही उस पर कोई कार्रवाई हुई। यहीं से शुरू हुआ ‘फाइलों से गायब पांचवें’ का सियासी रहस्य।
 


हरिप्रसाद की इस प्रेस कांफ्रेंस के बाद से कांग्रेस विधायक भी बड़ी दुविधा में हैं। हर कोई यह चर्चा कर रहा है कि जब पांच क्रॉस वोटिंग हुई हैं तो चार के नाम ही पब्लिक क्यों हुए। साथ ही, यह सवाल भी हवा में तैर रहा है कि अगर सही में चार ही विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है तो फिर पांचवें विधायक की वोट कहां गई। बेशक, पांचवां नाम भी सोशल मीडिया और कांग्रेसियों की जुबान पर हैं, लेकिन प्रभारी इसे स्वीकारने के लिए राजी नहीं हैं।
 
राज्यसभा चुनाव के आंकड़े खुद ही पूरी कहानी बयां कर रहे हैं। 90 सदस्यीय विधानसभा में 88 विधायकों ने मतदान किया। कांग्रेस के चार और भाजपा के एक विधायक का वोट रद्द हुआ। यानी कुल 83 वैध वोट गिने गए। कांग्रेस के पास 37 विधायक थे, लेकिन उसके उम्मीदवार को सिर्फ 28 वोट मिले। अगर सिर्फ चार विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की होती और चार वोट रद्द हुए होते, तो यह आंकड़ा 29 होना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यही अंतर साफ संकेत देता है कि कहीं न कहीं एक अतिरिक्त वोट ‘गायब’ है, जो क्रॉस वोटिंग की संख्या को पांच तक ले जाता है।

 
बीके हरिप्रसाद ने जिन चार विधायकों को ‘बागी’ घोषित किया, उनमें नारायणगढ़ विधायक शैली चौधरी, साढौरा विधायक रेणु बाला, पुन्हाना विधायक मोहम्मद इलियास और हथीन विधायक मोहम्मद इसराइल शामिल हैं। इन चारों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है और उनके नाम हरियाणा कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति को भेजे गए। यह कार्रवाई जितनी तेज दिखी, उतनी ही अधूरी भी नजर आई, क्योंकि ‘पांचवें’ का कोई जिक्र ही नहीं हुआ।

 
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह है कि पार्टी के भीतर ही एकरूपता नहीं दिख रही। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि पांच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। मंगलवार को भी उन्होंने विधानसभा में प्रेस कांफ्रेंस करके पूरे दावे के साथ कहा था कि पांच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है और सभी के नाम हाईकमान को भेज दिए हैं। इतना ही नहीं, पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी पांच नामों की चर्चा कर चुके हैं। इसके बावजूद संगठन की आधिकारिक कार्रवाई सिर्फ चार नामों तक सीमित रहना, अपने आप में बड़ा संकेत है कि मामला सतह से कहीं ज्यादा गहरा है।


अब पूरा फोकस उस एक नाम पर आकर टिक गया है, जो सबको पता है, लेकिन कोई बोल नहीं रहा। क्या वह विधायक इतना प्रभावशाली है कि पार्टी उसका नाम लेने से बच रही है। या फिर उसके खिलाफ ठोस सबूत नहीं हैं। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि चार विधायकों के खिलाफ पार्टी के पास पुख्ता प्रमाण हैं, इसलिए उन्हें नोटिस जारी किया गया। पांचवें मामले में या तो सबूत कमजोर हैं, या फिर जांच अभी अधूरी है। लेकिन राजनीति में ‘आधा सच’ अक्सर पूरे विवाद को और बड़ा बना देता है।

 

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