खैर के पेड़ों पर चला 'चोरों' का कुल्हाड़ा, लापरवाही बरतने वाले दो जिला वन अधिकारियों की छुट्टी...

Edited By Isha, Updated: 22 Mar, 2026 01:54 PM

two district forest officers suspended for negligence

हरियाणा के जंगलों से बेशकीमती खैर के पेड़ों की तस्करी और चोरी के मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक तूल पकड़ लिया है। प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री ने विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ एक आपातकालीन हाई-लेवल मीटिंग की।

डेस्क: हरियाणा के जंगलों से बेशकीमती खैर के पेड़ों की तस्करी और चोरी के मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक तूल पकड़ लिया है। प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री ने विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ एक आपातकालीन हाई-लेवल मीटिंग की। बैठक के दौरान यमुनानगर और प्रभावित क्षेत्रों में पेड़ों की सुरक्षा में बरती गई भारी लापरवाही और कथित मिलीभगत के सबूत सामने आने के बाद दो डीएफओ (Division Forest Officers) को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए गए।

 
पिछले कुछ महीनों से यमुनानगर के शिवालिक क्षेत्र और कलेसर नेशनल पार्क के आसपास के जंगलों से खैर के सैकड़ों पेड़ काटे जाने की शिकायतें मिल रही थीं। खैर के पेड़ की लकड़ी का उपयोग कत्था बनाने में होता है, जिसकी बाजार में कीमत लाखों रुपये है। स्थानीय निवासियों और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि यह खेल निचले स्तर के कर्मचारियों से लेकर बड़े अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहा है।

 
मीटिंग के दौरान वन मंत्री ने स्पष्ट किया कि जंगलों की रक्षा करना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और लापरवाही को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे, तो प्रदेश की प्राकृतिक संपदा नहीं बचेगी। निलंबित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी बिठाई गई है।"

 
निलंबन की इस कार्रवाई के बाद पूरे वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा केवल डीएफओ तक सीमित नहीं है; आने वाले दिनों में कई रेंजर और फॉरेस्ट गार्ड पर भी गाज गिर सकती है। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें अब उन लकड़ी तस्करों की तलाश में हैं, जो रातों-रात सरकारी जंगलों को साफ कर रहे थे।

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