Edited By Manisha rana, Updated: 16 Mar, 2026 08:47 AM

हरियाणा में होने जा रहे राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस इस बार बेहद सतर्क दिखाई दे रही है। पिछले चुनावों के अनुभव और क्रॉस वोटिंग की घटनाओं से सबक लेते हुए पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व किसी भी प्रकार की चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता।
चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा में होने जा रहे राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस इस बार बेहद सतर्क दिखाई दे रही है। पिछले चुनावों के अनुभव और क्रॉस वोटिंग की घटनाओं से सबक लेते हुए पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व किसी भी प्रकार की चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता। यही कारण है कि कांग्रेस के अधिकांश विधायकों को हिमाचल प्रदेश के कसौली भेजने के साथ-साथ वहां उन्हें स्पष्ट और कड़ा राजनीतिक संदेश भी दे दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार हिमाचल भ्रमण पर गए हरियाणा कांग्रेस के 31 विधायकों तथा वे 6 विधायक जो किसी कारणवश हिमाचल नहीं जा पाए, सभी तक पार्टी आलाकमान का स्पष्ट संदेश पहुंचा दिया गया है। यह संदेश हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और अन्य वरिष्ठ राष्ट्रीय नेताओं के माध्यम से विधायकों तक कन्वे कराया गया। इसमें साफ कहा गया है कि हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में यदि किसी भी विधायक की वोट तकनीकी कारणों से रद्द होती है या क्रॉस वोटिंग की स्थिति बनती है, तो इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा।
कांग्रेस नेतृत्व ने यह भी संकेत दिया है कि ऐसी स्थिति में हरियाणा के बड़े नेताओं को सीधे जिम्मेदार माना जाएगा। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार आलाकमान ने यह तक चेतावनी दी है कि यदि चुनाव में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो हरियाणा कांग्रेस के बड़े चेहरों को “ऑपरेशन क्लीन” जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसका अर्थ यह माना जा रहा है कि संगठनात्मक फेरबदल, जिम्मेदारियों में बदलाव या अनुशासनात्मक कार्रवाई से भी परहेज नहीं किया जाएगा।
दरअसल हरियाणा के पिछले राज्यसभा चुनावों में जिस प्रकार की राजनीतिक घटनाएं सामने आई थीं, उन्होंने कांग्रेस को गहरा राजनीतिक झटका दिया था। क्रॉस वोटिंग और तथाकथित “पेन प्रकरण” के कारण पार्टी का गणित बिगड़ गया था और अंततः निर्दलीय उम्मीदवार की जीत ने कांग्रेस की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए थे। उसी अनुभव से सबक लेते हुए इस बार पार्टी नेतृत्व पहले से ही पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। इस पूरे प्रकरण में कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार Karmveer Bauddh को लेकर भी विधायकों को विशेष रूप से स्पष्ट संदेश दिया गया है। पार्टी नेतृत्व ने कहा है कि कर्मवीर बौद्ध को राज्यसभा का टिकट किसी गुट या धड़े के आधार पर नहीं दिया गया, बल्कि यह निर्णय सीधे राष्ट्रीय नेतृत्व ने लिया है। इसलिए हर विधायक का यह दायित्व है कि वह पार्टी लाइन का पूरी तरह पालन करे।
बताया जा रहा है कि कुछ राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी रही कि कर्मवीर बौद्ध लंबे समय तक हरियाणा सचिवालय में अधिकारी रहे हैं और पारंपरिक राजनीतिक पृष्ठभूमि से नहीं आते। लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने इस सोच को भी स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि राज्यसभा उम्मीदवार पार्टी का आधिकारिक प्रत्याशी है और उसके समर्थन में मतदान करना हर विधायक की राजनीतिक और संगठनात्मक जिम्मेदारी है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि विधायकों को मतदान की पूरी प्रक्रिया को लेकर भी सावधान किया गया है। राज्यसभा चुनाव में मतदान का तरीका सामान्य चुनावों से अलग होता है और इसमें छोटी सी तकनीकी गलती भी वोट को अमान्य कर सकती है। इसलिए पार्टी नेतृत्व चाहता है कि हर विधायक पूरी सावधानी और अनुशासन के साथ मतदान करे ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी चूक की संभावना न रहे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरियाणा के राज्यसभा चुनाव को कांग्रेस नेतृत्व केवल एक सीट के चुनाव के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि इसे संगठनात्मक अनुशासन की परीक्षा भी माना जा रहा है। अगर पार्टी इस चुनाव में पूरी एकजुटता के साथ मतदान करवाने में सफल रहती है, तो यह न केवल राजनीतिक संदेश देगा बल्कि हरियाणा कांग्रेस में नेतृत्व की पकड़ को भी मजबूत करेगा।
स्पष्ट है कि इस बार कांग्रेस आलाकमान ने पहले ही कड़े संकेत दे दिए हैं कि राज्यसभा चुनाव में किसी भी प्रकार की लापरवाही या राजनीतिक खेल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस अपने विधायकों को पूरी तरह एकजुट रख पाती है या फिर हरियाणा की राजनीति एक बार फिर कोई नया मोड़ लेती है।
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