बीच रोड़ पर ऑटो खड़ा कर लगाया जाम, अदालत ने सुनाई ये सजा

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 28 Sep, 2026 03:12 PM

auto rickshaw parked in the middle of the road causing a traffic jam

एमजी रोड पर बीच सड़क पर ऑटो खड़ा कर ट्रैफिक जाम लगने के मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रजत वर्मा की अदालत ने आरोपी विकास कुमार राज और राम नारायण यादव को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 285 के तहत दोषी ठहराया है।

गुड़गांव, (ब्यूरो): एमजी रोड पर बीच सड़क पर ऑटो खड़ा कर ट्रैफिक जाम लगने के मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रजत वर्मा की अदालत ने आरोपी विकास कुमार राज और राम नारायण यादव को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 285 के तहत दोषी ठहराया है। हालांकि, दोनों अभियुक्तों द्वारा अदालत के समक्ष किए गए आवेदन और उनके आचरण को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें छह महीने की अवधि के लिए प्रोबेशन पर रिहा करने का आदेश दिया है।

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अदालत में पेश की गई पुलिस रिपोर्ट के अनुसार 26 अगस्त 2026 को पुलिस थाना डीएलएफ सेक्टर-29 के एएसआई विनोद अपनी टीम के साथ सिटी सेंटर मॉल के पास गश्त और अपराध रोकथाम ड्यूटी पर मौजूद थे। इस दौरान पुलिस टीम ने देखा कि दो ऑटो सड़क के बिल्कुल बीच में और गलत दिशा में खड़े किए गए थे। इसके चलते मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी और यातायात में भारी बाधा उत्पन्न हो रही थी। जब पुलिस टीम ऑटो चालकों के पास पहुंची तो उनकी पहचान बिहार के मधुबनी जिले के रहने वाले विकास कुमार राज निवासी सुबाटोल, थाना नरहिया और राम नारायण यादव निवासी चिचोड़ना, थाना लौकाही के रूप में हुई। पुलिस द्वारा पूछताछ किए जाने पर दोनों चालक सड़क के बीचों-बीच गाड़ियां खड़ी करने का कोई संतोषजनक या वाजिब कारण पेश नहीं कर सके। 

 

 

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सहायक सरकारी वकील आरती सोलंकी ने तर्क दिया कि पुलिस की गवाही और मौके का साइट प्लान स्पष्ट रूप से साबित करता है कि आरोपियों ने आम जनता के लिए खतरा और सड़क पर रुकावट पैदा की थी। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता लवकेश सिरोही ने दलील दी कि मामले में कोई भी स्वतंत्र या आम नागरिक गवाह शामिल नहीं किया गया है और केवल पुलिसकर्मियों के बयान के आधार पर आरोपियों को झूठा फंसाया गया है।

 

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि केवल पुलिस गवाह होने के कारण गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता यदि वह सत्य और विश्वसनीय हो। अदालत ने पाया कि साइट प्लान और साक्ष्यों से साफ है कि ऑटो मुख्य सड़क पर गलत दिशा में खड़े थे। इस आधार पर कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बीएनएस की धारा 285 के तहत दोषी करार दिया।  न्यायधीश रजत वर्मा की अदालत ने दोषियों की आपराधिक पृष्ठभूमि न होने और उनके सुधार के अवसर को ध्यान में रखते हुए नरम रुख अपनाया। कोर्ट ने दोनों दोषियों को 10-10 हजार रुपये के प्रोबेशन बांड और छह महीने तक शांति व सदाचार बनाए रखने के प्रतिवचन पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि प्रोबेशन अधिकारी इस अवधि के दौरान उनके आचरण की निगरानी करेंगे और रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करेंगे।

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