Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 26 Sep, 2026 07:00 PM

DHL लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ हुई 2.84 करोड़ रुपये की आपराधिक विश्वासघात के मामले में सुनवाई करते हुए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट हरि किशन की अदालत ने कंपनी के पूर्व कर्मचारी विनोद कुमार गौड और उसकी पत्नी शांति देवी को दोषी करार दिया।
गुड़गांव, (ब्यूरो): DHL लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ हुई 2.84 करोड़ रुपये की आपराधिक विश्वासघात के मामले में सुनवाई करते हुए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट हरि किशन की अदालत ने कंपनी के पूर्व कर्मचारी विनोद कुमार गौड और उसकी पत्नी शांति देवी को दोषी करार दिया। कोर्ट ने दोनों को एक-एक साल के साधारण कारावास और दो-दो रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
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जानकारी के अनुसार आरोपी विनोद कुमार गौड डीएचएल कंपनी के गुरुग्राम स्थित उत्तर क्षेत्रीय कार्यालय में सीनियर एग्जीक्यूटिव (ऑपरेशंस) के पद पर कार्यरत था और जनवरी 2012 में उसने पद से इस्तीफा दे दिया था। कंपनी को साल 2013-14 में कंपनी के आंतरिक ऑडिट और एक अन्य पूर्व कर्मचारी के बयान के बाद करोड़ों रुपये के गबन का खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि विनोद गौड ने नौकरी के दौरान अपनी पत्नी शांति देवी के नाम से आरके लॉजिस्टिक्स नाम की एक प्रोपराइटरशिप फर्म खोल रखी थी। कंपनी के दो बड़े ग्राहकों भोले बाबा डेयरी इंडस्ट्रीज लिमिटेड और भोले बाबा मिल्क फूड इंडस्ट्रीज लिमिटेड को सेवाएं तो डीएचएल की ओर से दी जा रही थीं, लेकिन आरोपी विनोद गौड ने क्रेडिट कंट्रोल विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर डीएचएल के बिल ऑफ लैडिंग की कॉपी करके अपनी पत्नी की फर्म आरके लॉजिस्टिक्स के नाम से फर्जी इनवॉइस/बिल जारी कर दिए गए।
भोले बाबा कंपनियों ने डीएचएल की सेवाओं के बदले सारा भुगतान आरके लॉजिस्टिक्स के बैंक खाते में जमा कर दिया। उधर डीएचएल के सॉफ्टवेयर में फर्जी और कूटरचित अकाउंटिंग प्रविष्टियां करके यह दिखाया गया कि ग्राहकों का कोई बकाया नहीं है। अन्य ग्राहकों के अनअडजस्टेड क्रेडिट बैलेंस का इस्तेमाल करके खातों को फर्जी तरीके से चुकता दिखाया गया। इस पूरी साजिश के जरिए आरोपियों ने कंपनी को दो करोड़ 84 लाख 89 हजार 459 रुपये का वित्तीय नुकसान पहुंचाया और खुद अवैध मुनाफा कमाया।
मामला सामने आने के बाद जुलाई 2014 में गुरुग्राम के एक होटल में पक्षों के बीच एक समझौता पत्र निष्पादित हुआ, जिसके तहत आरोपी विनोद गौड और शांति देवी ने एक करोड़ रुपये चुकाने पर सहमति जताई और चार चेक सौंपे गए,लेकिन बैंक खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण वे सभी चेक बाउंस हो गए। इसके बाद कंपनी ने पुलिस आयुक्त को शिकायत देकर मामला दर्ज करवाया गया। सुनवाई के दौरान आरोपी विनोद गौड ने अपना बचाव करते हुए कहा कि वह सिर्फ डेटा एंट्री का काम देखता था और उसका वित्तीय लेन-देन से कोई लेना-देना नहीं था। उसने यह भी आरोप लगाया कि समझौते के कागज और उसकी पत्नी के हस्ताक्षर वाले कोरे चेक उससे डरा-धमकाकर छीने गए थे।
वहीं, उसकी पत्नी शांति देवी ने खुद को अनपढ़ और निर्दोष बताते हुए सारा काम अपने दिवंगत देवर द्वारा संभाले जाने का दावा किया था। हालांकि, अदालत ने सबूतों के विश्लेषण के दौरान पाया कि आरोपी विनोद गौड़ की परफॉर्मेंस रिपोर्ट से साबित हुआ कि वही अकेले बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक भोले बाबा कंपनियों का काम संभाल रहा था। आर के लॉजिस्टिक्स के बिलों पर आरोपी विनोद गौड़ का निजी मोबाइल नंबर और दोनों आरोपियों के घर का पता दर्ज था। दोनों आरोपियों में से किसी ने भी चेक छीने जाने या दबाव में हस्ताक्षर कराने की कोई पुलिस शिकायत दर्ज नहीं कराई थी।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और पेश किए गए दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद माना कि अभियोजन पक्ष धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत आरोप साबित करने में पूरी तरह सफल रहा है। हालांकि धारा 420 (धोखाधड़ी) और 468 (जालसाजी) के तहत पर्याप्त तकनीकी साक्ष्य न होने के कारण आरोपियों को इन धाराओं से बरी कर दिया गया। न्यायाधीश हरि किशन ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह मामला केवल तकनीकी चूक का नहीं बल्कि भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाने वाले आपराधिक विश्वासघात का है। अदालत ने दोनों दोषियों को एक-एक साल के कारावास और दो-दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद दोषियों द्वारा ऊपरी अदालत में अपील दायर करने की अवधि तक के लिए उन्हें अंतरिम जमानत दे दी गई है।