Edited By Isha, Updated: 30 Sep, 2026 11:30 AM

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा 1 अप्रैल 2026 से प्रदेशभर में पेड़ों की कटाई पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध की खुलेआम धज्जियां उड़ाने का मामला सामने आया है। बैन के महज 19 दिन बाद ही धनोरा बीट (साहा रेंज) में एनएच-344 के किनारे 80 हरे-भरे पेड़ अवैध रूप...
अम्बाला: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा 1 अप्रैल 2026 से प्रदेशभर में पेड़ों की कटाई पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध की खुलेआम धज्जियां उड़ाने का मामला सामने आया है। बैन के महज 19 दिन बाद ही धनोरा बीट (साहा रेंज) में एनएच-344 के किनारे 80 हरे-भरे पेड़ अवैध रूप से काट दिए गए।
इस मामले में लीपापोती करने और गलत रिपोर्ट पेश करने पर वन विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए वन रक्षक (फॉरेस्ट गार्ड) को सस्पेंड कर दिया है। अम्बाला के उप वन संरक्षक नरेश रंगा ने साहा रेंज में तैनात वन रक्षक सुरेंद्र सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन की अवधि के दौरान उन्हें नारायणगढ़ रेंज कार्यालय से अटैच किया गया है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब वन रक्षक सुरेंद्र सिंह ने अपनी रिपोर्ट में 20 अप्रैल को 20 और 24 अप्रैल को 22 (कुल 42) पेड़ ही कटे होने का दावा किया था। हालांकि, जब साहा के वन रेंज अधिकारी ने खुद मौके का भौतिक निरीक्षण किया, तो वहां 80 पेड़ कटे पाए गए।
रेंजर द्वारा 21 सितंबर को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में वन रक्षक की मिलीभगत और लापरवाही उजागर हुई, जिसके बाद डीएफओ ने यह कार्रवाई की। विभागीय नियमों के अनुसार, जब वन रक्षक किसी अवैध कटाई पर चालान काटता है, तो उसके बाद मौके पर जाकर सत्यापन करना, जुर्माना वसूलना या पर्यावरण कोर्ट में केस फाइल करने की जिम्मेदारी वन दरोगा की होती है। इस मामले में भी आगे की भूमिका और अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच की जा रही है।
हाईकोर्ट के कड़े रुख के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले मुख्य आरोपियों और अवैध कटाई करने वालों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ पर्यावरण कानूनों के तहत सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।