सोसाइटियों से गायब हो गई मेम साहेब बोलने वाली मेड ?

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 02 May, 2026 07:40 PM

have the maids who used to call themselves  mem saheb  disappeared from the soci

पश्चिम बंगाल के मजदूरों का 90% तक पलायन, गैस के दाम बढ़ाने की वजह से बिहार के मजदूर भी काफी संख्या में कर चुके हैं पलायन

गुड़गांव, ब्यूरो : साइबरसिटी गुरुग्राम के लोगों इन दिनों घरों में काम करने वाली मेड व मजदूर नहीं मिलने से काफी परेशान हैं। इन दिनों जो कामगार शहर में हैं वे जांदी कूटने में जुट गए हैं। कामगारों की कमी के कारण घरों में साफ-सफाई व अन्य कार्य करने वाली महिलाएं व अन्य कामगारों ने अपनी मजदूरी डबल से भी ज्या कर दी है जिससे परेशानी और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यह समस्या तब शुरु हुआ जब अमेरिका व ईरान का युद्ध शुरु हुआ। युद्ध के दौरान से देश में गैस की ऐसी किल्लत हुई कि मजदूरों को गैस मिला मुश्किल हो गया। दरअसल यहां ज्यादातर कामगार छोटे सिलेंडर रखते हैं जिसे दुकानों में पहले 70 रुपए किलों के हिसाब रिफिल कराते थे। लेकिन गैस की समस्या ऐसी पैदा हुई कि अप्रैल माह में तो गैस किसी भी दाम पर मिलना बंद हो गया। साथ ही पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान यह अफवाह फैल गई कि जो चुनाव में वोट डालने नई जाएगा उसका वोट ही कट जाएगा। इन सबको देखते हुए अचानक ही कुछ ही दिनों के भीतर लाखों की संख्या में कामगार पलायन कर गए। कामगारों के पलायन के कारण अब लोगों के सामने बड़ी समस्याएं खड़ी हो रही हैं।  

 

बिहार के मजदूर के पलायन होने से बढ़ी मजदूरी, 60 प्रतिशत कामगारों का पलायन

बिहार के मजदूरों के पलायन से कंस्ट्रक्शन लाइन में समस्या खड़ी हो गई है। पहले मजदूरों की एक दिन की मजदूरी 600 या 700 रूपए थी अब वही मजदूर 1000 रुपए ले रहे हैं। वही कंस्ट्रक्शन लाइन में काम करने वाले राजमिस्त्री अब 1200 ले रहे है। इस संदर्भ में राज मिस्त्री उमेश मंडल एवं दिनेश कुमार का कहना है कि पहले उन्हें गैस सिलेंडर 400 में छोटे वाला मिल जाता था, अब वही गैस सिलेंडर 1500 से 2000 में मिल रहा है। यहां खाना महंगा हो गया, इसलिए मजदूरी महगी हो गई। मजदूरी में बचत नहीं होने के कारण ज्यादातर मजदूर अब गांव की तरफ पलायन कर रहे हैं।

 

70% मेड शहर से गायब

सैक्टर 31 निवासी अमन जेलदार का कहना है कि पहले हमारे यहां एक एक महिला उसका परिवार साफ सफाई से लेकर घर का सारा काम करते थे लेकिन पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान ही वह अपने गांव चले गए। कई कामगार तो बिना बताए ही अपने गांव चले गए। अब डबल मजदूरी देने पर भी घर में काम करने वाले कामगार नहीं मिल रहे हैं। कारण यह है कि कामगारों की समस्या पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, जिसके कारण इस तरह की समस्या उत्पन्न हुई है। उन्हे लगता है कि 70 प्रतिशत से भी अधिक कामगार पजायन कर चुके हैं।

 

सेक्टर 32 सोसाइटी में रहने वाले सुनील मान का कहना है कि बीते 1 महीने से घर में काम करने वाले साफ सफाई वाले मजदूर नहीं मिल रहे हैं, जिस कारण उन्हें खुद अपने घर की साफ सफाई करनी पड़ रही है। कुछ मजदूर मिलते तो है लेकिन वह आने को कह कर भी कम पर नहीं आते हैं। कारण यह है कि जो घरों में काम करने वाले मजदूर हैं उनके पास कई घरों का काम है, मजदूरों की कमी होने के कारण वह सभी जगह अपनी सर्विस नहीं दे पा रहे हैं। सुनील मान का कहना है कि कामगारों की कमी बड़ी समस्या है। अगर हालात यही रहे तो लोगों की परेशानी और ज्यादा बढ़ेगी।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!