Edited By Krishan Rana, Updated: 01 May, 2026 04:27 PM

शहर के गांव बाढ़सा में इस बार सरपंच का उपचुनाव महज एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक ही परिवार के भीतर सीधी टक्कर का
बहादुरगढ़ : शहर के गांव बाढ़सा में इस बार सरपंच का उपचुनाव महज एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक ही परिवार के भीतर सीधी टक्कर का रूप ले चुका है। पूर्व सरपंच ज्ञानचंद के निधन से खाली हुई सीट पर उनके तीनों सगे बेटे दीपक (45), रमेश (43) और मनोज (40) चुनावी मैदान में उतर आए हैं। पिता की विरासत संभालने की यह होड़ अब भाइयों के बीच मुकाबले में बदल गई है, जिससे गांव की सियासत काफी दिलचस्प और गर्म हो गई है।
मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2022 में ग्रामीणों ने ज्ञानचंद को सरपंच चुना था, लेकिन पिछले साल मई में उनके निधन के बाद यह पद खाली हो गया। अब इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है। ग्राम पंचायत बाढ़सा में कुल 3450 मतदाता हैं और सरपंच पद एससी वर्ग के लिए आरक्षित है।
हालांकि उपचुनाव में कुल नौ उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा ज्ञानचंद के तीनों बेटों के चुनाव लड़ने को लेकर है। गांव में यह भी चर्चा है कि जो बेटे पहले अपने पिता के लिए वोट मांगते थे, अब वही अपने-अपने लिए मतदाताओं के बीच जा रहे हैं।
तीनों बेटों ने चुनाव मैदान में उतरने का कारण बताया
पूर्व सरपंच के सबसे बड़े बेटे दीपक का कहना है कि उन्होंने अपने पिता के सरपंच कार्यकाल में हमेशा उनका सहयोग किया और वे सभी कामकाज से परिचित हैं। उन्होंने चुनाव मैदान में उतरने का फैसला पिता के अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए लिया है। वहीं दूसरे बेटे रमेश पेशे से वकील हैं और गुरुग्राम में प्रैक्टिस करते हैं। उनका कहना है कि वे एक शिक्षित और सामाजिक व्यक्ति हैं और पिता के मार्गदर्शन में ही राजनीति में आए हैं।
सबसे छोटे बेटे मनोज स्नातक हैं और उनका कहना है कि उनका अपने पिता से विशेष लगाव था। वे भी सरपंच के कार्यों में सहयोग करते थे। मनोज का दावा है कि परिवार के कुछ सदस्यों का उन्हें समर्थन प्राप्त है। तीनों भाइयों के चुनाव लड़ने पर उन्होंने कहा कि परिवार के बड़े-बुजुर्ग सभी को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं और जो भी निर्णय होगा, उसका सम्मान किया जाएगा।
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