Edited By Isha, Updated: 01 May, 2026 08:41 AM

हरियाणा की राजनीति में बड़ी हलचल पैदा करते हुए राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ सीबीआई को मुकदमा चलाने की औपचारिक मंजूरी दे दी है।
चंडीगढ़: हरियाणा की राजनीति में बड़ी हलचल पैदा करते हुए राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ सीबीआई को मुकदमा चलाने की औपचारिक मंजूरी दे दी है।यह मामला पंचकूला के इंडस्ट्रियल एरिया में 14 औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। सरकार के इस फैसले के बाद अब सीबीआई हुड्डा के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है।
हरियाणा सरकार ने केवल भूपेंद्र सिंह हुड्डा ही नहीं, बल्कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HUDA) के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी मुकदमा चलाने की अनुमति दी है। इनमें हूडा के पूर्व मुख्य वित्त नियंत्रक एससी कंसल और पूर्व उप अधीक्षक बीबी तनेजा शामिल हैं। हुडा के तत्कालीन मुख्य प्रशासक के मामले में सक्षम प्राधिकारी डीओपीटी (DoPT) है, जिसे मुख्य सचिव के माध्यम से पहले ही अनुरोध भेजा जा चुका है।
यह मामला साल 2013 का है जब हुड्डा मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए हुडा के चेयरमैन भी थे। सीबीआई ने 2016 में इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी और इसी साल फरवरी में राज्य सरकार से मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी।
ईडी ने बताया था ‘मुख्य साजिशकर्ता’
प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले में पहले ही 2021 में चार्जशीट दाखिल कर चुका है, जिसमें भूपेंद्र सिंह हुड्डा को ‘मुख्य साजिशकर्ता’ करार दिया गया था। ईडी के अनुसार, हुड्डा ने कथित तौर पर पूरी योजना बनाई और अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए आवंटन के पात्रता मानदंडों में बदलाव किए। जांच एजेंसी का आरोप है कि अनुभव और योग्यता जैसी शर्तों को हटा दिया गया और साक्षात्कार (viva-voce) के अंक 15 से बढ़ाकर 25 कर दिए गए ताकि चयन प्रक्रिया में विवेक का इस्तेमाल कर अपनों को लाभ दिया जा सके।
ईडी की जांच में सामने आया कि जो 14 प्लॉट आवंटित किए गए, उनके प्राप्तकर्ता हुड्डा के नजदीकी रिश्तेदार या परिचित थे। इनमें हुड्डा के पैतृक गांव सांघी के निवासी, उनके स्कूल के साथी के बेटे, उनके निजी सचिव के बेटे और अन्य करीबियों के नाम शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि हुड्डा ने चयन के अंतिम मानदंड तब मंजूर किए जब आवेदन की अंतिम तिथि (6 जनवरी 2012) निकल चुकी थी और सभी आवेदन हुडा कार्यालय के पास पहुंच चुके थे।
सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन प्लॉटों के आवंटन में नियमों की अनदेखी के साथ-साथ आर्थिक अनियमितताएं भी बरती गईं। जिस समय प्लॉट बांटे गए, उस समय उनका बाजार मूल्य और सर्कल रेट काफी अधिक था। ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 30.34 करोड़ रुपये की कीमत वाले प्लॉट मात्र 7.85 करोड़ रुपये में बेच दिए गए, जिससे सरकारी खजाने को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा। इंटरव्यू की प्रक्रिया को भी ‘दिखावा’ बताया गया है, जहां कुछ मामलों में आवेदकों से कोई सवाल तक नहीं पूछे गए और अंकों की शीट पर हस्ताक्षर इंटरव्यू के छह महीने बाद किए गए।