शहरों की समस्याओं के समाधान की दिशा में सार्थक व पारदर्शी कदम साबित होगा ‘अर्बन चैलेंज फंड’: मनोहर लाल

Edited By Krishan Rana, Updated: 15 Apr, 2026 08:46 PM

urban challenge fund  will prove to be a meaningful and transparent step toward

केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने वीरवार को नई दिल्ली में शहरी विकास की महत्वाकांक्षी योजना ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के लिए

नई दिल्ली (संजय अरोड़ा): केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने वीरवार को नई दिल्ली में शहरी विकास की महत्वाकांक्षी योजना ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के लिए संचालन संबंधी दिशानिर्देशों के साथ-साथ ऋण पुनर्भुगतान गारंटी उप-योजना का शुभारंभ किया। इस योजना में पहले चरण में 1 लाख करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है, जिसे बढ़ाकर 4 लाख करोड़ रुपए किया जाना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहरों व कस्बों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ समस्याओं के समाधान की दिशा में एक सार्थक व पारदर्शी कदम कहा जा सकता है।

यह योजना देश में शहरी आधारभूत को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए आयोजित अहम बैठक में मध्य प्रदेश, गुजरात और ओडिशा सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने वीडियो संदेशों के जरिए बैठक को संबोधित किया। इस अवसर पर शहरों को वित्तीय संस्थानों, बैंकों और क्रेडिट रेटिंग एजैंसियों से जोडऩे वाली एक ई-डायरेक्टरी भी लांच की गई, ताकि अर्बन चैलेंज फंड के प्रभावी कार्यान्वयन को सुगम बनाया जा सके।

इस कार्यक्रम में आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय और सभी राज्यों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर भी किए गए, जिसमें अर्बन चैलेंज फंड के प्रभावी कार्यान्वयन की दिशा में सहयोगात्मक प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई। इसके अतिरिक्त, शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों और क्षमता निर्माण केंद्रों जैसे ज्ञान भागीदारों, बैंकों, गैर-वित्तीय व वित्तीय संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों, क्रैडिट रेटिंग एजैंसियों और व्यापारी बैंकरों सहित वित्तीय संस्थानों साथ ही निजी क्षेत्र की संस्थाओं सहित प्रमुख हितधारकों के साथ आशय पत्रों र डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए गए, जो शहरी परिवर्तन परियोजनाओं के वित्तपोषण, क्षमता निर्माण और कार्यान्वयन के लिए एक व्यापक इको-सिस्टम को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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इस दौरान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने संबोधन में कहा कि ‘अर्बन चैलेंज फंड’ भारत के शहरी विकास के दृष्टिकोण में एक क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह फंड केवल अनुदान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक निधियों का उपयोग करके बड़े निवेशों को गति प्रदान करने और शहरों को आर्थिक रूप से मजबूत और निवेश के लिए तैयार बनाने के बारे में है। मनोहर लाल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के शहर आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार सृजन के इंजन के रूप में उभर रहे हैं। 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना इस बात पर निर्भर करेगा कि शहरों की योजना, वित्तपोषण और प्रशासन कितने प्रभावी ढंग से किया जाता है। उन्होंने कहा कि अमृत, स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटी मिशन जैसी योजनाओं ने शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है, लेकिन अगले चरण में शहरों को निवेश के लिए तैयार और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है। 

‘अर्बन चैलेंज फंड’ में है बड़े बजट का प्रावधान

केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड में एक बड़े बजट का प्रावधान किया गया है। एक लाख करोड़ रुपए से शुरू हुई इस परियोजनाओं को बाजार आधारित वित्तपोषण के माध्यम से लगभग चार गुणा निवेश जुटाने के लिए एक उत्प्रेरक साधन के रूप में तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सहायता परियोजना लागत के 25 प्रतिशत तक सीमित रहेगी, जबकि कम से कम 50 प्रतिशत निधि नगरपालिका बांड, बैंक ऋण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से जुटाई जाएगी, जिससे वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित होगा और निजी भागीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने यह भी बताया कि कुल परिव्यय में से 90,000 करोड़ रुपए परियोजनाओं के लिए 5,000 करोड़ रुपए परियोजना निर्माण और क्षमता निर्माण के लिए तथा 5,000 करोड़ रुपए ऋण पुनर्भुगतान गारंटी उप-योजना के लिए आवंटित किए गए हैं। सी.आर.जी.एस.एस. से विशेष रूप से छोटे शहरों को ऋण गारंटी के माध्यम से बाजार आधारित वित्तपोषण प्राप्त करने में सहायता मिलेगी, जिनमें द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहर तथा पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों के शहर शामिल हैं। अपने संबोधन में मनोहर लाल ने इस बात पर जोर दिया कि यह कोष पुराने शहरी क्षेत्रों और बाजारों के पुनर्विकास, शहरी आवागमन और अंतिम दूरी तक कनैक्टिविटी, गैर-मोटर चालित परिवहन, जल और स्वच्छता संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर तथा जलवायु के अनुकूल शहरी विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में परिवर्तनकारी परियोजनाओं का समर्थन करेगा। उन्होंने कहा कि उन परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो व्यापक, प्रभावशाली और वित्तपोषित होने योग्य हों और जिनसे दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक लाभ प्राप्त हो सकें।

विकसित शहरों के निर्माण का अनूठा अवसर है ‘अर्बन चैलेंज फंड’

स्थानीय निकायों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि शहरों को अपनी वित्तीय क्षमता बढ़ाने, सुधार अपनाने और बाजार आधारित वित्तपोषण प्रणाली में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने राज्यों और शहरी स्थानीय निकाय से आग्रह किया कि वे अर्बन चैलेंज फंड को केवल एक योजना के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, सशक्त और निवेश के लिए तैयार शहरों के निर्माण के अवसर के रूप में देखें। वहीं अर्बन फंड चैलेंज के महत्व पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने अपने ऑफिशियल एक्स हैंडल पर टवीट करते हुए लिखा कि ‘अर्बन चैलेंज फंड के ऑपरेशनल गाइडलाइंस, क्रैडिट रिपेमैंट गारंटी सब-स्कीम गाइडलाइंस तथा यू.सी.एफ. पार्टनर्स की ई-डायरेक्टरी का शुभारंभ किया गया।

अर्बल चैलेेंज फंड पारंपरिक अनुदान-आधारित सहायता से हटकर बाजार-आधारित और सुधार-प्रेरित वित्तपोषण की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। यह पहल निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करेगी और शहरी विकास में सुशासन और जवाबदेही को मजबूत बनाएगी। यह निधि मजबूत, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार शहरों के निर्माण में सहायक होगी। अर्बन चैलेंज फंड भारत की आर्थिक वृद्धि के अगले चरण का एक प्रमुख चालक बनने की दिशा में अग्रसर है, जो निवेश को बढ़ावा देगा, नवाचार को प्रोत्साहित करेगा और शहरों को विकास एजैंडा में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए सशक्त बनाएगा।’  

वहीं बैठक को संबोधित करते हुए आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्रीनिवास कटिकिथला ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का शहरीकरण एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहा है। अर्बन चैलेंज फंड शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए बाजार से जुड़ा, सुधार-उन्मुख और परिणाम-केंद्रित ढांचा प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि यह कोष बुनियादी ढांचे के निर्माण को वित्तीय स्थिरता और संस्थागत मजबूती के साथ जोड़ता है, साथ ही परियोजनाओं की ऋण योग्यता और राजकोषीय अनुशासन पर भी विशेष जोर देता है। 

ये हैं अर्बन चैलेंज फंड की प्रमुख विशेषताएं

खास बात यह है कि अर्बन चैलेंज फंड भारत सरकार की 1 लाख करोड़ की एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसे बजट 2025-26 में शहरी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए शुरू किया गया था। यह योजना 2025-26 से 2030-31 तक चैलेंज-मोड के तहत नगर पालिकाओं को सुधार-उन्मुख और बैंक योग्य परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिससे सतत शहरीकरण को बढ़ावा मिले। इससे अगले पांच वर्षों में शहरी क्षेत्र में कुल चार लाख करोड़ रुपए का निवेश होगा, जो अनुदान आधारित वित्तपोषण से हटकर बाजार से जुड़े, सुधार-उन्मुख और परिणाम-उन्मुख अवसंरचना निर्माण की ओर भारत के शहरी विकास दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।

अर्बन चैलेंज फंड उच्च गुणवत्ता वाले शहरी बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए बाजार वित्त, निजी भागीदारी और नागरिक-केंद्रित सुधारों का लाभ उठाएगा। इस फंड का उद्देश्य लचीले, उत्पादक, समावेशी और जलवायु-अनुकूल शहरों का निर्माण करना है, ताकि ये शहर देश के आर्थिक विकास के अगले चरण के प्रमुख कारक बन सकें। यह निधि वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2030-31 तक परिचालन में रहेगी, जिसकी कार्यान्वयन अवधि वित्त वर्ष 2033-34 तक बढ़ाई जा सकती है। इस परियोजना वित्तपोषण का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा बाजार स्रोतों से जुटाया जाएगा, जिसमें नगरपालिका बांड, बैंक ऋण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी शामिल हैं। शेष हिस्सा राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, शहरी स्थानीय निकायों या अन्य स्रोतों द्वारा प्रदान किया जा सकता है।

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