टोहाना के गांव बोसती की पूजा ने हांगकांग में रचा इतिहास, अंडर-20 में तोड़ा 14 साल पुराना रिकॉर्ड

Edited By Manisha rana, Updated: 30 May, 2026 07:34 PM

tohana pooja created history in hong kong

हरियाणा की बेटियां एक बार फिर देश का मान बढ़ा रही हैं। टोहाना के गांव बोस्ती की बेटी पूजा ने चीन के हांगकांग में 28 से 31 मई तक हुई 22वीं अंडर-20 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हाई जंप में गोल्ड मेडल जीतकर 14 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड ध्वस्त कर...

टोहाना (सुशील सिंगला) : हरियाणा की बेटियां एक बार फिर देश का मान बढ़ा रही हैं। टोहाना के गांव बोस्ती की बेटी पूजा ने चीन के हांगकांग में 28 से 31 मई तक हुई 22वीं अंडर-20 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हाई जंप में गोल्ड मेडल जीतकर 14 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया।

पूजा ने शुक्रवार देर रात हुए फाइनल में 1.93 मीटर की छलांग लगाकर न सिर्फ खिताब अपने नाम किया, बल्कि अंडर-20 आयु वर्ग में सबसे ऊंचा जंप लगाने का रिकॉर्ड भी बना दिया। इससे पहले पूजा का पर्सनल बेस्ट 1.83 मीटर था। फाइनल में उसने सीधे 10 सेंटीमीटर का इजाफा कर सबको चौंका दिया। मेजबान चीन की माईकी चेन 1.80 मीटर के साथ दूसरे और ताइपे की पेई-ह्सुआन लिन व श्रीलंका की मिहंसा देवमिनी 1.72 मीटर के साथ संयुक्त तीसरे स्थान पर रहीं। इस चैंपियनशिप में देश के 51 खिलाड़ी उतरे थे, जिनमें हरियाणा से पूजा के अलावा रोहतक की निश्चय और मुस्कान भी शामिल थीं।

पूजा के कोच बलवान ने फोन पर बताया कि कर्नाटक की साहना कुमारी ने 2012 में सीनियर चैंपियनशिप में 1.92 मीटर जंप लगाया था। पूजा ने अंडर-20 में भाग लेते हुए ही सीनियर का रिकॉर्ड तोड़ दिया। वह 1999 में बने 1.95 मीटर के चैंपियनशिप रिकॉर्ड से महज 2 सेंटीमीटर से चूक गईं।  पूजा के लिए यह कोई पहली उपलब्धि नहीं है। 2024 में दक्षिण कोरिया के गुमी में हुई एशियन चैंपियनशिप में 1.89 मीटर जंप कर गोल्ड जीत चुकी हैं। 2022 में अंडर-16 नेशनल में 1.76 मीटर कूदकर सीनियर खिलाड़ी पावना नागार्जन का 1.73 मीटर का रिकॉर्ड तोड़ा था। नेशनल गेम्स में स्वर्ण जीतने पर पीएम नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' में उनके संघर्ष का जिक्र किया था।

सफलता के पीछे है संघर्ष की लंबी कहानी 

सफलता के पीछे संघर्ष की लंबी कहानी है। पिता हंसराज राजमिस्त्री और मां किरण गृहणी हैं। घर में प्रोफेशनल जंपिंग पिट नहीं था, तो कोच बलवान ने खेत में घास, पराली और थर्माकोल भरकर देसी पिट बनाया। फाइबर के डंडे की जगह बांस की लकड़ी से प्रैक्टिस कराई। 10 साल की उम्र से पांचवीं क्लास में पढ़ते हुए पूजा 5 किमी दूर गांव पारता में कोच बलवान से ट्रेनिंग लेने जाती थी। पिछले 9 साल से लगातार मेहनत और अब 6 महीने से बेंगलोर कैंप में ट्रेनिंग का नतीजा है कि बोस्ती की बेटी आज वर्ल्ड ट्रैक पर तिरंगा लहरा रही है।

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