प्राइवेट स्कूलों को आज देनी होगी ये पूरी जानकारी, नहीं तो सरकार लेगी Action... जानिए क्या है कारण

Edited By Isha, Updated: 12 May, 2026 08:17 AM

private schools must submit complete details regarding admissions today

हरियाणा के प्राइवेट स्कूलों में आरटीई के तहत दाखिला पाने की आस लगाए हजारों परिवारों के लिए आज का दिन बेहद अहम है। शिक्षा निदेशालय के निर्देशानुसार, सोमवार को सभी निजी स्कूलों को पोर्टल पर अपनी

डेस्क: हरियाणा के प्राइवेट स्कूलों में आरटीई के तहत दाखिला पाने की आस लगाए हजारों परिवारों के लिए आज का दिन बेहद अहम है। शिक्षा निदेशालय के निर्देशानुसार, सोमवार को सभी निजी स्कूलों को पोर्टल पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इससे न केवल यह पता चलेगा कि किस ब्लॉक के किस स्कूल ने कितने आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को अपने यहां जगह दी है, बल्कि उन कारणों पर भी रोशनी पड़ेगी जिनके आधार पर स्कूल दाखिलों को रद्द कर रहे हैं। गौरतलब है कि रविवार रात 12 बजे तक स्कूलों के पास डेटा अपडेट करने की अंतिम मोहलत थी।

 

शिक्षा निदेशालय से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, इस सत्र में आरटीई के तहत पूरे प्रदेश से कुल 41,045 आवेदन प्राप्त हुए थे। गहन छानबीन के बाद विभाग ने 40,892 आवेदनों के दस्तावेजों का मिलान किया, जिनमें से मुख्यालय ने 31,009 बच्चों की पात्रता पर मुहर लगाई। हालांकि, वेरिफिकेशन के अंतिम चरण के बाद केवल 21,752 बच्चों को ही स्कूल अलॉट किए जा सके। विभाग ने 1,804 आवेदनों को तकनीकी या अन्य खामियों के चलते रद्द कर दिया था।

 

दाखिले की दौड़ में सबसे आगे पहली कक्षा के छात्र रहे। इस वर्ग में कुल 8,538 आवेदन मिले थे, जिनमें से 7,680 बच्चों को उनकी पसंद या नजदीकी के आधार पर स्कूल आवंटित किए गए। वहीं, यूकेजी (UKG) में 4,561 आवेदनों में से 1,909 और एलकेजी (LKG) में 4,602 आवेदनों में से केवल 1,283 बच्चों को ही सीट मिल सकी। अब निदेशालय यह देखना चाहता है कि अलॉटमेंट के बाद वास्तव में कितने बच्चे स्कूल की दहलीज पार कर पाए हैं।

 

हिसार सहित प्रदेश के सभी जिलों में आज इस बात की स्क्रूटनी शुरू हो जाएगी कि स्कूलों ने अलॉट किए गए बच्चों को प्रवेश देने में कितनी रुचि दिखाई है। कई बार शिकायतें आती हैं कि निजी स्कूल कागजी कार्रवाई या अन्य बहानों से गरीब बच्चों को दाखिला देने से कतराते हैं। हेड ऑफिस की तरफ से सीटों की तुलना में हुए असल दाखिलों की सघन जांच की जाएगी। यदि किसी स्कूल ने बिना किसी ठोस कारण के निदेशालय द्वारा अलॉट किए गए बच्चे का दाखिला रद्द किया है, तो उस पर विभाग का डंडा चल सकता है।

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