Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 21 May, 2026 07:18 PM

सुशांत लोक फेज-एक में करोड़ों रुपये की कीमत वाले एक प्लॉट को फर्जी तरीके से हड़पने और धोखाधड़ी कर बेचने का मामला सामने आया है। पुलिस ने एक शिकायत की लंबी और गहन जांच के बाद वजीराबाद और गुरुग्राम मुख्य तहसील के करीब 39 साल पुराने रिकॉर्ड खंगाले,...
गुड़गांव, (ब्यूरो): सुशांत लोक फेज-एक में करोड़ों रुपये की कीमत वाले एक प्लॉट को फर्जी तरीके से हड़पने और धोखाधड़ी कर बेचने का मामला सामने आया है। पुलिस ने एक शिकायत की लंबी और गहन जांच के बाद वजीराबाद और गुरुग्राम मुख्य तहसील के करीब 39 साल पुराने रिकॉर्ड खंगाले, जिसके बाद फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ। पुलिस ने इस मामले में जालसाजी, धोखाधड़ी और अवैध कब्जे के प्रयास के तहत भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं में मंगलवार को सुशांतलोक थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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पुलिस के मुताबिक, मूलरूप से झज्जर बहादुरगढ़ निवासी हार्दिक नारंग ने 12 अप्रैल को थाना सुशांत लोक में एक शिकायत दर्ज कराई थी। हार्दिक ने बताया कि सुशांत लोक फेज-एक के सी-ब्लॉक में स्थित प्लॉट नंबर 1300 उनके नाम पर है। यह प्लॉट मूल रूप से साल 1993 में उनके पिता संजय नारंग को अलॉट हुआ था, जिसे उनके पिता ने 14 नवंबर 2023 को वजीराबाद तहसील में बाकायदा ट्रांसफर डीड के तहत उनके नाम ट्रांसफर कर दिया था।
हार्दिक ने बताया कि 11 अप्रैल 2026 को जब वे अपने प्लॉट को देखने पहुंचे, तो उनके प्लॉट के ठीक बगल वाले प्लॉट नंबर 1299 के मालिक ने कब्जा करने की नीयत से हार्दिक के प्लॉट में नींव की खुदाई शुरू कर दी थी। जब हार्दिक ने मिस्त्री से बात कर प्लॉट मालिकसे संपर्क किया, तो आरोपी ने खुद को ही उस जमीन का मालिक बताते हुए मिलने का समय दिया, लेकिन वह मौके पर नहीं आया। इसके बाद पीड़ित ने तुरंत पुलिस को फोन कर मौके पर बुलाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुशांत लोक थाने के जांच अधिकारी ने जमीन के दस्तावेजों की गहराई से जांच शुरू की। पुलिस ने वजीराबाद तहसील से साल 2017 तक का रिकॉर्ड और मुख्य तहसील गुरुग्राम से साल 1987 से पहले का पुराना रिकॉर्ड निकलवाया। सरकारी रिकॉर्ड के अध्ययन के बाद पुराने रिकॉर्ड के अनुसार, प्लॉट के असल मालिक संजय नारंग निवासी बहादुरगढ़, जिला झज्जर ही थे। जांच में पता चला कि 26 जून 2010 को संजय नारंग के नाम का ही इस्तेमाल करके उनका पता बदलकर कीमती प्लॉट की रजिस्ट्री सुमन लता निवासी हिसार के नाम करा दी गई थी। यह रजिस्ट्री 29 जून 2010 को दर्ज हुई थी।
इस पूरे खेल में असली मालिक कौन है और साल 2010 में हुई रजिस्ट्री के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन था, इसकी कड़ियों को जोड़ने के लिए पुलिस ने उच्च अधिकारियों से अनुमति ली। इसके बाद 19 मई 2026 को सुशांत लोक थाने में मामला दर्ज किया गया। जांच अधिकारी ने बताया कि तहसील से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार प्लॉट नंबर 1300 के मालिकाना हक को लेकर बड़ा हेरफेर पाया गया है। साल 2010 में हुई रजिस्ट्री और हाल ही में प्लॉट नंबर 1299 के मालिक द्वारा किए गए अवैध निर्माण के प्रयास की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।