Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 21 May, 2026 07:28 PM

नाबालिग बेटे को बाइक देने पर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने कड़ा संज्ञान लेते हुए पिता के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) के कड़े आदेश के बाद नाबालिग के पिता के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम (एमवी एक्ट) की सख्त धारा 199ए के...
गुड़गांव, (ब्यूरो): नाबालिग बेटे को बाइक देने पर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने कड़ा संज्ञान लेते हुए पिता के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) के कड़े आदेश के बाद नाबालिग के पिता के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम (एमवी एक्ट) की सख्त धारा 199ए के तहत सोहना सिटी थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कोर्ट ने जांच अधिकारी को कड़ी फटकार लगाते हुए 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे।
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सोहना में एक नाबालिग को ट्रैफिक पुलिस ने बाइक चलाते हुए फव्वारा चौक पर पकड़ा था और बाइक के कागज नहीं होने पर पुलिस ने जब्त कर ली थी। 17 अप्रैल 2026 को नाबालिग का पिता बाइक को छुड़वाने के लिए कोर्ट में याचिका लगाई गई। याचिका में लगाए दस्तावेजों में सामने आया कि बाइक चला रहा युवक नाबालिग है। इलाका मजिस्ट्रेट ने नाबालिग घोषित कर मामला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को भेज दिया था।
19 मई 2026 को इस चालान के निपटारे को लेकर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की प्रधान न्यायाधीश ज्योति ग्रोवर के समक्ष सुनवाई हुई थी। कोर्ट में गुरुग्राम पुलिस की तरफ से सहायक लोक अभियोजक पूजा और फव्वारा चौकी प्रभारी एसआई राजबीर पेश हुए। सुनवाई के दौरान कोर्ट बोर्ड में चौकी प्रभारी राजबीर का ध्यान मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199ए की तरफ दिलाया। मजिस्ट्रेट ने पुलिस अधिकारी से तीखे सवाल पूछे जब कानून में स्पष्ट प्रावधान है, तो आपने नाबालिग के पिता या वाहन के मालिक के खिलाफ जांच क्यों नहीं की? नाबालिग के अभिभावक को इस मामले में आरोपी क्यों नहीं बनाया गया और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई।
अदालत के इन कड़े सवालों का चालान अधिकारी एसआई राजबीर के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। इसके बाद कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया। प्रधान मजिस्ट्रेट ज्योति ग्रोवर ने सोहना के फव्वारा पुलिस चौकी के प्रभारी एसआई राजबीर को सख्त निर्देश दिए कि 24 घंटे के भीतर नाबालिग के पिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए, मामले की गहन जांच की जाए और अंतिम पुलिस रिपोर्ट इलाका मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश की जाए। इस आदेश के बाद आवेदक ने चालान के निपटारे के लिए लगाई गई अपनी अर्जी को भी अदालत से वापस ले लिया।