"सोशल मीडिया बना रिश्तों में दरार, समाज घृणित दिशा में जा रहा”, हांसी में रेनू भाटिया ने किए चौंकाने वाले खुलासे

Edited By Harman, Updated: 04 May, 2026 05:48 PM

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हांसी जिला बनने के बाद अपने पहले आधिकारिक दौरे पर पहुंचीं हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने ऐसे कई मामलों का जिक्र किया, जिन्होंने सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक संरचना पर चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने बताया कि हांसी और फतेहाबाद जिलों से कुल...

हांसी (संदीप सैनी) : हांसी जिला बनने के बाद अपने पहले आधिकारिक दौरे पर पहुंचीं हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने ऐसे कई मामलों का जिक्र किया, जिन्होंने सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक संरचना पर चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने बताया कि हांसी और फतेहाबाद जिलों से कुल 22 शिकायतें सामने आईं, जिनमें से अधिकांश का समाधान कर दिया गया, जबकि 4–5 मामलों को दोबारा जांच (री-इंक्वायरी) के लिए लंबित रखा गया है। इन मामलों में कुछ ऐसे भी थे, जो रिश्तों को कलंकित करने वाले और समाज को शर्मसार करने वाले हैं। रेनू भाटिया ने कहा कि कई मामलों में पत्नी अपने पति पर ही परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अवैध संबंधों के आरोप लगा रही है, वहीं कुछ मामलों में पड़ोसी रिश्तों का दुरुपयोग कर ब्लैकमेलिंग और शोषण जैसी घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने साफ कहा कि ऐसे मामले समाज को “घृणित दिशा” में ले जा रहे हैं।

महिलाओं द्वारा रिश्तों का दुरुपयोग भी चिंता का विषय

महिला आयोग आमतौर पर महिलाओं की शिकायतों को प्राथमिकता देता है, लेकिन इस बार दो ऐसे मामलों की सुनवाई भी की गई, जहां पुरुष अपनी बेटियों के संरक्षण के लिए न्याय मांग रहे थे। एक मामले में 16 वर्षीय और दूसरे में विवाहित बेटी के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की गई।

एक अन्य गंभीर मामले में पारिवारिक विवाद के चलते बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा था। इस पर आयोग ने सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत दादा-दादी को उनकी संपत्ति वापस दिलाने और पोती की कस्टडी उन्हें देने का निर्देश दिया।

गांवों में भी बदल रहा सामाजिक माहौल

भाटिया ने कहा कि पहले यह धारणा थी कि शहरों में जाकर युवा बिगड़ते हैं, लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी लिव-इन रिलेशनशिप और अवैध संबंधों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि 38 और 48 वर्ष की महिलाओं के युवा लड़कों के साथ संबंधों के मामले सामने आए, जो समाज के लिए चिंताजनक संकेत हैं।

एंपावरमेंट की गलत परिभाषा पर उठाए सवाल

रेनू भाटिया ने कहा कि “इंडिपेंडेंस” और “महिला सशक्तिकरण” की गलत व्याख्या ने कई परिवारों को तोड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सशक्तिकरण का मतलब परिवार और रिश्तों का संतुलन बनाए रखना है, न कि अहंकार या स्वच्छंदता के नाम पर संबंधों को तोड़ना।

सोशल मीडिया और मोबाइल का बढ़ता प्रभाव

उन्होंने माना कि सोशल मीडिया का समाज पर गहरा प्रभाव है। इसका सही उपयोग विकास की ओर ले जा सकता है, जबकि दुरुपयोग जीवन को बर्बाद कर सकता है। उन्होंने इसे “तेजाब” की तरह बताया—जिसका इस्तेमाल सफाई के लिए भी हो सकता है और नुकसान पहुंचाने के लिए भी।

लिव-इन रिलेशनशिप पर कड़ा रुख

लिव-इन रिलेशनशिप पर अपने निजी विचार रखते हुए भाटिया ने कहा कि पिछले वर्षों में उन्होंने एक भी ऐसा मामला नहीं देखा, जहां लिव-इन से परिवार बसा हो। उल्टा, इससे परिवार टूटे हैं और महिलाओं तथा बच्चों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने युवतियों को सावधान करते हुए कहा कि लिव-इन में जाने से पहले साथी की पूरी जानकारी लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि कई बार शादीशुदा पुरुष धोखे से संबंध बनाते हैं और बाद में विवाद खड़े होते हैं।

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