Edited By Krishan Rana, Updated: 28 Mar, 2026 04:31 PM

धर्मशाला में आयोजित एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. राहुल (प्रोक्टोलॉजिस्ट), जनता पाइल्स हॉस्पिटल ने बताया कि
हरियाणा डेस्क : धर्मशाला में आयोजित एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. राहुल (प्रोक्टोलॉजिस्ट), जनता पाइल्स हॉस्पिटल ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को पाइल्स, फिशर और फिस्टुला जैसी बीमारियों से राहत प्रदान करना है।
इस अवसर पर उन्होंने जानकारी दी कि अस्पताल द्वारा 2 अप्रैल को एक नि:शुल्क मेडिकल कैंप आयोजित किया जा रहा है। इस कैंप में मरीजों की जांच, विशेष रूप से कोलोनोस्कोपी जैसी महंगी जांच, बिल्कुल मुफ्त की जाएगी। किसी भी प्रकार का OPD या अन्य शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस कैंप में अनुभवी जनरल सर्जन और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मौजूद रहेगी।
डॉ. राहुल ने बताया कि उनके अस्पताल में आधुनिक और विश्वस्तरीय तकनीकों के माध्यम से बिना सर्जरी के भी इलाज संभव है। पाइल्स के लिए लेजर ट्रीटमेंट, इन्फ्रारेड कोएगुलेशन (IRC) और क्रायोथेरेपी जैसी उन्नत विधियों का उपयोग किया जाता है। क्रायोथेरेपी में -190°C तापमान पर पाइल्स के मस्सों को फ्रीज कर दिया जाता है, जिससे वे कुछ दिनों में स्वतः समाप्त हो जाते हैं। इन प्रक्रियाओं में मरीज को भर्ती होने या एनेस्थीसिया की आवश्यकता नहीं होती और वह तुरंत अपने दैनिक कार्य कर सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल मरीजों को लाइफटाइम ट्रीटमेंट सपोर्ट कार्ड प्रदान करता है, जिसके अंतर्गत भविष्य में समस्या दोबारा होने पर नि:शुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
डॉ. राहुल ने कहा कि वर्तमान समय में खराब लाइफस्टाइल, अनियमित खान-पान, फास्ट फूड का अधिक सेवन, पानी की कमी, और मोबाइल का अत्यधिक उपयोग पाइल्स जैसी बीमारियों के मुख्य कारण बनते जा रहे हैं। लंबे समय तक टॉयलेट में बैठना और शारीरिक गतिविधि की कमी भी इस समस्या को बढ़ाते हैं।
पाइल्स और फिशर के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि पाइल्स में गुदा क्षेत्र की नसों में सूजन आ जाती है, जिससे खून आना, दर्द, खुजली और जलन जैसे लक्षण होते हैं। वहीं फिशर एक प्रकार का घाव होता है, जिसमें मल त्याग के दौरान तेज दर्द और जलन होती है।
उन्होंने विभिन्न उपचार पद्धतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हर पैथी का अपना महत्व है, लेकिन उनका उद्देश्य मरीज को शीघ्र और सुरक्षित राहत प्रदान करना है। पारंपरिक सर्जरी के स्थान पर अब आधुनिक तकनीकों और आयुर्वेदिक क्षारसूत्र विधि का भी सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है।
अंत में, डॉ. राहुल ने लोगों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की समस्या होने पर घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें, बल्कि समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें और जागरूकता बढ़ाएं।
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