Edited By Manisha rana, Updated: 27 Mar, 2026 04:11 PM

सिरसा जिले के मत्तड गांव के युवा किसान गुरप्रीत सिंह आधुनिक सब्जी और फल की खेती कर रहे हैं। उनकी नवोन्मेषी पद्धतियों ने उन्हें क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना दिया है।
सिरसा (सतनाम सिंह) : सिरसा जिले के मत्तड गांव के युवा किसान गुरप्रीत सिंह आधुनिक सब्जी और फल की खेती कर रहे हैं। उनकी नवोन्मेषी पद्धतियों ने उन्हें क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना दिया है। किसान गुरप्रीत सिंह का परिवार लगभग 30 वर्षों से खेती का काम कर रहे है। उनके दादा बचन सिंह ने एक छोटे से भूखंड पर सब्जी की खेती शुरू की थी, जिसे उनके पिता गुरचरण सिंह ने आगे बढ़ाया।
पिछले सोमवार को दो दिवसीय कृषि मेले में भी किया गया सम्मानित
गुरप्रीत सिंह को पिछले सोमवार को हिसार के चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय कृषि मेले में सम्मानित भी किया गया। इसके साथ कृषि में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने पर उन्हें पांच प्रमाण पत्र और पुरस्कार प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। गुरप्रीत सिंह को मुख्यमंत्री द्वारा भी सम्मानित किया गया था। यही नहीं किसान गुरप्रीत सिंह को मुख्यमंत्री दो बार सम्मानित कर चुके है।
गुरप्रीत ने आधुनिक तकनीक और कृषि उपकरण पेश किए, जिनमें मल्चिंग, ट्रेलिसिंग और नेट फार्मिंग शामिल हैं। वर्तमान में, गुरप्रीत पांच एकड़ भूमि पर लगभग 63 किस्मों की सब्जियां उगाते हैं। इनमें दुर्लभ स्थानीय किस्में और कुछ विदेशी किस्में भी शामिल हैं। इस मौसम में, उन्होंने जल-उपजाऊ सब्जियों की नई किस्में पेश की हैं। खरबूजा और लौकी की खेती करने वाला यह किसान मध्यमवर्गीय वर्ग का होने के बावजूद, एक छोटे से क्षेत्र से अच्छा मुनाफा कमाता है और दूसरों को रोजगार के अवसर प्रदान करता है। उनकी सब्जी संग्रह में पांच प्रकार के टमाटर शामिल हैं - चेरी, लाल, काला, पीला और नारंगी; पांच प्रकार की शिमला मिर्च - हरी, लाल, पीली, बैंगनी और नारंगी; और सात प्रकार की फूलगोभी - सफेद, पीली, नारंगी, ब्रोकोली, हरी, लाल और गांठदार फूलगोभी।
मुख्यमंत्री दो बार कर चुके हैं सम्मानित
युवा किसान गुरप्रीत सिंह ने कहा कि वह वेजिटेबल पर खेती कर रहे हैं, जो अलग-अलग प्रकार की हैं और वह भी सीजनल वेजिटेबल नहीं है। जो देश-विदेश सब्जियों बाजार में आसानी से नहीं मिलती उन सब्जियों की वो खेती कर रहे है। गुरप्रीत ने कहा कि उनके दादा और पिता खेती से जुड़े होने के कारण उनका रुझान भी इस और हुआ। उनके दादा और पिता परंपरागत खेती करते थे और मुनाफा भी नहीं था, लेकिन जब से उन्होंने अलग हटके खेती की तो उन्हें अच्छा मुनाफा मिल। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से भी उन्हें काफी सहयोग मिला और उन्होंने अपनी खेती को एक नया रूप दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ उठाते हुए उन्होंने अपनी खेती को एक नई पहचान दी है इसके लिए उन्हें मुख्यमंत्री दो बार सम्मानित भी कर चुके हैं। गुरप्रीत सिंह ने साथी किसानों को सलाह दी कि अगर नियमित फसलों के साथ-साथ सब्जियां भी उगाई जाएं तो छोटे भूखंड भी लाभदायक हो सकते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि मेहनत तो कठिन है, लेकिन परिणाम संतोषजनक होते हैं।
गुरप्रीत सिंह के पिता गुरबचन सिंह ने कहा कि उनके पिता व दादा खेती करते थे। उन्होंने कहा कि शुरू से ही वह सब्जियां उगाने का काम कर रहे हैं। लेकिन अब हरियाणा सरकार की योजना का लाभ उठाते हुए इसे आगे बढ़ाया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का धन्यवाद करना चाहते हैं कि गांव में जब बाढ़ आई तो सरकार की ओर से उन्हें प्रोत्साहित किया गया और किसान की खेती घाटे का सौदा नहीं है यह उन्होंने करके दिखाया।
वहीं जिला उधान अधिकारी डॉ दीन मोहम्मद ने बताया कि हमारे जिले के किसान काफी प्रगतिशील किसान है उनमें से किसान गुरप्रीत ने अलग-अलग तरीके से सब्जियां उगाकर दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बने है। किसान गुरप्रीत सिंह को मुख्यमंत्री दो बार सम्मानित कर चुके हैं। यह हमारे सिरसा जिले के लिए सम्मान की बात है उन्होंने कहा कि किसानों को सरकार की योजना का लाभ उठाते हुए परंपरागत खेती को छोड़कर नई किस्म की खेती की और ध्यान देना चाहिए जिसे पानी की भी बचत होगी।
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