News Impact: धर्मनगरी में ‘नॉन-वेज’ पर ब्रेक, मेन्यू से नॉन-वेज हुआ गायब...खुलेआम बिक्री बंद

Edited By Isha, Updated: 28 Mar, 2026 06:59 PM

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स्थानीय लोगों की उठी मांग के बाद धर्मनगरी में नॉन-वेज बिक्री के मुद्दे को जब पंजाब केसरी के कुरुक्षेत्र केसरी समाचार पत्र एवं पंजाब केसरी टी.वी. पर प्रमुखता से समाचार प्रकाशित और प्रसारित किया गया, तो इसका असर भी अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा...

कुरुक्षेत्र (कपिल शर्मा): स्थानीय लोगों की उठी मांग के बाद धर्मनगरी में नॉन-वेज बिक्री के मुद्दे को जब पंजाब केसरी के कुरुक्षेत्र केसरी समाचार पत्र एवं पंजाब केसरी टी.वी. पर प्रमुखता से समाचार प्रकाशित और प्रसारित किया गया, तो इसका असर भी अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। खबर के बाद प्रशासन और प्रसारण के बाद प्रशासन हरकत में आया और शहर के होटल-रेस्टोरेंट्स पर निगरानी तेज कर दी गई।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार, पहले जहां शहर के कई नामी होटलों में खुलेआम नॉन-वेज परोसा जा रहा था, वहीं अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। अधिकांश होटलों और रेस्टोरेंट्स ने अपने मेन्यू कार्ड से नॉन-वेज आइटम्स हटा दिए हैं। कई स्थानों पर तो इसकी बिक्री पूरी तरह बंद कर दी गई है। जो गतिविधियां पहले खुलेआम चल रही थीं, वे अब अचानक गायब हो गई हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मीडिया में खबर आने के बाद ही प्रशासन ने गंभीरता दिखाई। लगातार निरीक्षण और कार्रवाई के डर से होटल संचालकों में हड़कंप मच गया है। यही कारण है कि अब वे नियमों का पालन करने को मजबूर हो गए हैं।

धार्मिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि कुरुक्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए इस तरह के कदम बेहद जरूरी हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि यह सख्ती आगे भी जारी रखी जाए, ताकि भविष्य में दोबारा इस तरह की स्थिति पैदा न हो।

हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि अंदरखाने अब भी नॉन-वेज बिक्री की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन फिलहाल खुलेआम होने वाली गतिविधियों पर काफी हद तक रोक लग चुकी है। यह बदलाव सीधे तौर पर पंजाब केसरी की खबरों की पहल और जनदबाव का परिणाम माना जा रहा है। प्रशासन की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि आगे भी नियमित जांच अभियान चलाए जाएंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कुल मिलाकर, यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि जब जनता की आवाज को मंच मिलता है, तो उसका असर प्रशासनिक व्यवस्था पर जरूर पड़ता है। फोटो-प्रकाशित समाचार की प्रति।(कपिल शर्मा)
 

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