छोटी काशी भिवानी बनी स्वर्ण नगरी, ग्लास्गो कॉमनवेल्थ में हरियाणा के खिलाड़ियों का सुनहरा पराक्रम

Edited By Isha, Updated: 05 Aug, 2026 11:50 AM

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हरियाणा ने एक बार फिर दुनिया के खेल मानचित्र पर अपनी बादशाहत साबित कर दी है। ग्लास्गो 2026 कॉमनवेल्थ खेलों में प्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न केवल भारत का मान बढ़ाया

चंडीगढ़(चन्द्र शेखर धरणी):   हरियाणा ने एक बार फिर दुनिया के खेल मानचित्र पर अपनी बादशाहत साबित कर दी है। ग्लास्गो 2026 कॉमनवेल्थ खेलों में प्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न केवल भारत का मान बढ़ाया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि देश के खेलों की असली ताकत हरियाणा की मिट्टी में बसती है। देश को मिले 13 स्वर्ण पदकों में से अकेले 7 स्वर्ण हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीतकर इतिहास रच दिया। कुल 10 पदक भी हरियाणा के खिलाड़ियों की झोली में आए, जो प्रदेश की मजबूत खेल संस्कृति और खिलाड़ियों की अथक मेहनत का प्रमाण हैं।

इन शानदार उपलब्धियों के सम्मान में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 7 अगस्त को पंचकूला में आयोजित विशेष समारोह में सभी पदक विजेता खिलाड़ियों के साथ-साथ कॉमनवेल्थ खेलों में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को भी सम्मानित करेंगे। सरकार का यह कदम उन खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है, जिन्होंने देश का तिरंगा विश्व मंच पर ऊंचा किया।

हरियाणा फिर बना भारत की सबसे बड़ी खेल शक्ति
हरियाणा की आबादी देश की कुल आबादी का छोटा हिस्सा है, लेकिन जब अंतरराष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने की बात आती है तो यह प्रदेश सबसे आगे दिखाई देता है। वर्षों से ओलंपिक, एशियाई खेल, विश्व चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल खेलों में हरियाणा के खिलाड़ियों का दबदबा बना हुआ है। ग्लास्गो कॉमनवेल्थ खेलों ने इस परंपरा को और मजबूत किया है।
विशेष बात यह रही कि इस बार कॉमनवेल्थ खेलों में हरियाणा से केवल 23 खिलाड़ी ही शामिल हुए, जबकि पिछले संस्करण में 40 से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। इसके बावजूद पदक जीतने का प्रतिशत पहले से कहीं अधिक रहा। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश के खिलाड़ी केवल संख्या में नहीं बल्कि गुणवत्ता में भी लगातार बेहतर हो रहे हैं।

भिवानी बनी 'स्वर्ण नगरी', मुक्केबाजों ने बरसाया सोना
हरियाणा के भिवानी जिले को वर्षों से "छोटी काशी" के नाम से जाना जाता है। मंदिरों और धार्मिक आस्था के लिए प्रसिद्ध यह जिला अब खेलों की दुनिया में नई पहचान हासिल कर चुका है। ग्लास्गो कॉमनवेल्थ खेलों के बाद यदि भिवानी को "स्वर्ण नगरी" कहा जाए तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
भिवानी की बेटी प्रीति पंवार, जैस्मिन लम्बोरिया, साक्षी चौधरी और प्रिया धनखड़ तथा भिवानी के मुक्केबाज सचिन सिवाच ने मुक्केबाजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की झोली में पांच स्वर्ण पदक डाल दिए। एक ही जिले के खिलाड़ियों द्वारा इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना भारतीय खेल इतिहास में भी विशेष उपलब्धि माना जाएगा।

भिवानी पहले से ही देश की मुक्केबाजी की राजधानी माना जाता रहा है। यहां की अकादमियों और प्रशिक्षकों ने वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए हैं और इस बार भी उन्होंने अपनी परंपरा को कायम रखा।

रेवाड़ी और हिसार ने भी बढ़ाया प्रदेश का गौरव
हरियाणा की सफलता केवल भिवानी तक सीमित नहीं रही। रेवाड़ी की शर्मिला धनखड़ ने शॉटपुट में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। वहीं हिसार के अंकुश पंघाल ने मुक्केबाजी में स्वर्ण जीतकर प्रदेश की झोली में एक और बड़ी सफलता जोड़ दी।
इन खिलाड़ियों ने साबित किया कि हरियाणा के लगभग हर जिले में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतिभाएं तैयार हो रही हैं और प्रदेश की खेल संस्कृति लगातार मजबूत होती जा रही है।

रजत और कांस्य पदकों से भी बढ़ी शान
स्वर्ण पदकों के अलावा हरियाणा के खिलाड़ियों ने अन्य स्पर्धाओं में भी शानदार प्रदर्शन किया। स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश का सम्मान बढ़ाया। मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल ने भी रजत पदक अपने नाम किया।
जैवलिन थ्रो में यशवीर ने कांस्य पदक जीता, जबकि सीमा कालीरमन ने डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक हासिल कर भारत के पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन सभी खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने यह संदेश दिया कि हरियाणा की नई पीढ़ी हर खेल में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही है।

कम खेल, कम खिलाड़ी... फिर भी शानदार प्रदर्शन
इस बार कॉमनवेल्थ खेलों में कई ऐसे खेल शामिल नहीं थे, जिनमें भारत और विशेष रूप से हरियाणा का दबदबा रहता है। कुश्ती, निशानेबाजी, हॉकी, क्रिकेट, टेबल टेनिस, बैडमिंटन और वॉलीबॉल जैसे खेल इस संस्करण का हिस्सा नहीं थे। यदि ये खेल शामिल होते तो हरियाणा के खिलाड़ियों की पदक संख्या और भी अधिक हो सकती थी। इसके बावजूद उपलब्ध संसाधनों और सीमित अवसरों में खिलाड़ियों ने जिस प्रकार का प्रदर्शन किया, वह उनकी क्षमता और आत्मविश्वास को दर्शाता है।

मेहनत, अनुशासन और जज्बे ने दिलाई सफलता
हरियाणा के खिलाड़ियों की सफलता रातोंरात नहीं मिली। इसके पीछे वर्षों का कठिन अभ्यास, अनुशासन, संघर्ष और परिवारों का त्याग छिपा है। अनेक खिलाड़ी ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को जिंदा रखा।
इन खिलाड़ियों ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। ग्लास्गो में मिली सफलता करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

प्रधानमंत्री ने भी सराही हरियाणा की खेल संस्कृति
हाल ही में जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में हरियाणा की खेल संस्कृति की खुलकर सराहना की थी। उन्होंने खिलाड़ियों से अपील की थी कि वे कॉमनवेल्थ खेलों में अधिक से अधिक पदक जीतकर देश का नाम रोशन करें। प्रधानमंत्री ने हरियाणा की खेल नीति की भी प्रशंसा करते हुए कहा था कि राज्य खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने 2036 ओलंपिक की मेजबानी भारत में कराने की इच्छा भी व्यक्त की और खिलाड़ियों से भविष्य की तैयारियों में जुटने का आह्वान किया।

खेल नीति बनी हरियाणा की सबसे बड़ी ताकत
हरियाणा की खेल नीति आज देश के लिए मॉडल बन चुकी है। प्रदेश सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को करोड़ों रुपये के नकद पुरस्कार देती है। उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सकारी नौकरियों में विशेष अवसर और खेल ग्रेडेशन नीति के तहत लाभ मिलता है।
गांव-गांव में खेल नर्सरियां, आधुनिक स्टेडियम, सिंथेटिक ट्रैक, इंडोर खेल परिसर और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं तैयार की जा रही हैं। महिला खिलाड़ियों को विशेष छात्रवृत्ति, मुफ्त कोचिंग और उन्नत प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। यही कारण है कि हरियाणा लगातार देश को विश्वस्तरीय खिलाड़ी दे रहा है।

सम्मान से बढ़ेगा खिलाड़ियों का हौसला
7 अगस्त को पंचकूला में आयोजित होने वाला सम्मान समारोह केवल पुरस्कार वितरण का कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि यह उन खिलाड़ियों के संघर्ष, समर्पण और उपलब्धियों को सलाम करने का अवसर भी होगा। सरकार ने यह निर्णय लेकर स्पष्ट संदेश दिया है कि पदक जीतने वाले ही नहीं, बल्कि देश का प्रतिनिधित्व करने वाले हर खिलाड़ी का सम्मान होना चाहिए।

हरियाणा का स्वर्णिम सफर जारी
ग्लास्गो कॉमनवेल्थ खेलों की उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि हरियाणा आज केवल कृषि और वीरता की भूमि ही नहीं, बल्कि भारत की सबसे बड़ी खेल शक्ति भी बन चुका है। यहां की मिट्टी में पसीने की खुशबू है, संघर्ष की ताकत है और जीत का जुनून है। यही कारण है कि जब भी विश्व मंच पर तिरंगा लहराता है, उसमें हरियाणा के खिलाड़ियों का योगदान सबसे चमकदार दिखाई देता है।
आने वाले वर्षों में यदि यही खेल संस्कृति, सरकारी सहयोग और खिलाड़ियों का समर्पण बना रहा तो 2036 ओलंपिक सहित विश्व के हर बड़े खेल आयोजन में हरियाणा के छोरे-छोरियां स्वर्णिम इतिहास लिखते रहेंगे और देश का गौरव बढ़ाते रहेंगे।

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