हजारों करोड़ के घोटाले की जांच पर अनिल विज का बड़ा एक्शन, कल बैठक में अधिकारियों की जवाबदेगी होगी तय

Edited By Harman, Updated: 04 Aug, 2026 06:15 PM

anil vij takes major action on the investigation of rs 10 000 crore scam

हरियाणा बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर वेलफेयर बोर्ड से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में श्रम मंत्री अनिल विज एक बार फिर सख्त रुख अपनाते दिखाई दे रहे हैं।

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : हरियाणा बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर वेलफेयर बोर्ड से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में श्रम मंत्री अनिल विज एक बार फिर सख्त रुख अपनाते दिखाई दे रहे हैं। जनवरी 2007 से जुलाई 2023 तक श्रमिकों के पंजीकरण और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में हुई संभावित गड़बड़ियों की जांच लंबे समय से लंबित रहने पर विज ने बुधवार, 5 अगस्त को श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। 

माना जा रहा है कि इस बैठक में लंबित जांच की प्रगति, जिम्मेदारी तय करने और आगे की कार्रवाई पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।सूत्रों का दावा है कि यदि वर्ष 2007 से 2023 तक की अवधि की व्यापक जांच होती है तो कथित अनियमितताओं का दायरा 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच सकता है। हालांकि, इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

पहले की जांच में सामने आई थीं बड़ी अनियमितताएं

श्रम मंत्री अनिल विज के निर्देश पर अगस्त 2023 से मार्च 2025 के बीच हरियाणा के सभी जिलों में जिलाधीशों के माध्यम से विशेष जांच करवाई गई थी। इस जांच का दायरा श्रमिकों के पंजीकरण और 90 दिनों के निर्माण कार्य के सत्यापन तक सीमित रखा गया था। सूत्रों के अनुसार इस जांच में करीब 1500 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं का पता चला था, जिसके बाद पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया।

डीसी रिपोर्ट के बाद बनी थी हाई लेवल कमेटी

जिलाधीशों की रिपोर्ट और विभिन्न योजनाओं में सामने आई गड़बड़ियों के बाद राज्य सरकार ने आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की थी। समिति की पांच से अधिक बैठकें भी हुईं और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर मंथन किया गया। हालांकि बाद में पंकज अग्रवाल की सीबीआई द्वारा एक बैंक घोटाले में गिरफ्तारी के बाद समिति की कार्यप्रणाली प्रभावित हुई। अब संभावना जताई जा रही है कि सरकार इस जांच समिति का पुनर्गठन कर सकती है, ताकि लंबित जांच को आगे बढ़ाया जा सके।

90 दिन की कार्य अवधि की जांच बनी सबसे बड़ा सवाल

हरियाणा बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर वेलफेयर बोर्ड में श्रमिक के रूप में पंजीकरण के लिए मुख्य रूप से तीन शर्तें निर्धारित हैं—18 से 58 वर्ष की आयु, वार्षिक 60 रुपये सदस्यता शुल्क तथा निर्माण कार्य में कम से कम 90 दिन कार्य करने का प्रमाण।सूत्रों के अनुसार विज ने जांच के पहले चरण में केवल 90 दिन के कार्य संबंधी रिकॉर्ड और पंजीकरण की जांच करवाई थी। इस दौरान प्रस्तुत वर्क स्लिप और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया गया। जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि बड़ी संख्या में दस्तावेज संदिग्ध पाए गए और लगभग 90 प्रतिशत मामलों में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले।

डीबीटी से सीधे खातों में पहुंची राशि, अब जवाबदेही पर सवाल

बोर्ड की अधिकांश योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजा गया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि फर्जी पंजीकरण हुए तो सत्यापन किस स्तर पर हुआ और लाभार्थियों का चयन कैसे किया गया। सूत्रों का कहना है कि श्रमिकों के सत्यापन की जिम्मेदारी विभागीय स्तर पर होती है। ऐसे में जांच का फोकस अब इस बात पर भी रहेगा कि कथित गड़बड़ियां ठेकेदारों, विभागीय कर्मचारियों अथवा अन्य स्तरों पर कैसे हुईं।

22 से अधिक योजनाओं की भी हो सकती है समीक्षा

हरियाणा बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर वेलफेयर बोर्ड के तहत श्रमिकों के लिए 22 से अधिक कल्याणकारी योजनाएं संचालित हैं। विवाह सहायता, शिक्षा, चिकित्सा, मातृत्व सहायता, उपकरण अनुदान और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर वर्षों से बड़ी राशि खर्च होती रही है। ऐसे में जांच का दायरा बढ़ने पर इन योजनाओं के लाभ वितरण की भी विस्तृत समीक्षा हो सकती है।

अब अफसरों से मांगा जाएगा जवाब

सूत्रों के अनुसार श्रम मंत्री अनिल विज ने जनवरी 2007 से जुलाई 2023 तक के सभी मामलों की जांच के आदेश काफी पहले जारी किए थे और समय-समय पर रिमाइंडर भी भेजे गए। इसके बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ने पर विज ने अब विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि लंबित जांच को गति मिलती है तो हरियाणा के श्रमिक कल्याण बोर्ड से जुड़े वर्षों पुराने मामलों की परतें खुल सकती हैं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।
 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!